जयपुर। राजस्थान नगर निकाय के चुनावों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को कड़ी टक्कर मिली है। कांग्रेस के साथ साथ निर्दलीय उम्मीदवारों ने कई शहरों में शानदार प्रदर्शन किया है। राजस्थान के 10 नगर निगमों में से भाजपा सिर्फ चार जीत पाई है। कांग्रेस ने तीन नगर निगमों में बढ़त बनाई है, जबकि जोधपुर में कांग्रेस और भाजपा लगभग बराबरी पर हैं।। दो नगर निगमों में निर्दलियों का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। देर शाम के नतीजों के मुताबिक राज्य में 10 हजार से ज्यादा सीटों पर हुए चुनाव में 42 सौ के करीब सीटों के साथ भाजपा सबसे आगे है। कांग्रेस को करीब 36 सौ और निर्दलियों को करीब 23 सौ सीटें मिली हैं।
गौरतलब है कि राजस्थान के 309 शहरी निकायों और 10 बड़े नगर निगमों के लिए दो चरणों में मतदान हुआ था। राज्य के 10,245 पार्षद पदों के लिए करीब 74 फीसदी मतदान हुआ था। करीब 1.44 करोड़ मतदाताओं ने अपना फैसला सुनाया है। सोमवार देर शाम तक की नतीजों के मुताबिक भाजपा ने जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस ने बीकानेर में पूर्ण बहुमत हासिल किया। कांग्रेस अजमेर और पाली में भी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। 21 सितंबर को मेयर और 22 सितंबर को उप मेयर के पद के लिए चुनाव होंगे।
उधर भरतपुर और जोधपुर जैसे शहरों में पेंच फंस गया है। वहां दोनों मुख्य पार्टियां बहुमत से दूर हैं और निर्दलीयों की भूमिका सबसे अहम हो चुकी है। राजधानी जयपुर में डेढ़ सौ सीटों में से भाजपा ने करीब 80 सीटें जीत कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। उदयपुर की 80 सीटों में से पार्टी ने 53 सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज की है। कांग्रेस महज 23 सीटों पर सिमट कर रह गई। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के क्षेत्र कोटा में भाजपा ने एक सौ में से 55 सीटें जीत कर स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। भीलवाड़ा में भाजपा ने 70 में से 45 वार्ड अपने नाम किए हैं।
दूसरी ओर कांग्रेस ने बीकानेर नगर निगम में एकतरफा जीत दर्ज करते हुए पूर्ण बहुमत हासिल किया। बीकानेर की 80 में से कांग्रेस ने 42 वार्डों में जीती। भाजपा को सिर्फ 27 सीटों से संतोष करना पड़ा। अजमेर के 80 वार्डों में कांग्रेस 37 सीटें जीतकर सबसे आगे रही। भाजपा को वहां 32 सीटें मिलीं। पाली में भी कांग्रेस 65 में से 29 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी रही। हालांकि अजमेर और पाली में पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े से थोड़ा पीछे रह गई है। जोधपुर की एक सौ सीटों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों को बराबर 44-44 सीटें मिली हैं। भरतपुर में तो निर्दलियों ने 65 में से 38 सीटों पर जीत दर्ज की।
