इन दिनों देश की राजनीति में नई पीढ़ी यानी ‘जेन जी’ की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। हर जगह, हर नेता की जुबान पर ये दो शब्द आ गए हैं। हालांकि नेपाल में आंदोलन के समय जब पहली बार यह शब्द चर्चा में आया तो ज्यादातर नेता समझ रहे थे कि यह चीन का कोई व्यक्ति है, जो नेपाल में आंदोलन भड़का रहा है। लेकिन आज भारत की संसद में नेता ‘जेन जी’ की भाषा के शब्दों का इस्तेमाल करके भाषण दे रहे हैं। दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को ‘जेन जी’ का आंदोलन कहा गया। उसके बाद एक रिपोर्ट आई, जिसमें अंग्रेजी के एक अखबार ने देश भर में ‘जेन जी’ य़ानी 29 साल से कम उम्र के सांसदों और विधायकों की एक सूची बनाई।
इस सूची में ज्यादातर नाम ऐसे सांसदों और विधायकों के हैं, जो किसी न किसी राजनीतिक परिवार से आते हैं। यह स्थिति सांसदों के मामले में ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक 543 में से कुल छह सांसद ऐसे हैं, जो 29 साल से कम उम्र के हैं। इनमें कांग्रेस की संजना जाटव को छोड़ कर बाकी पांच राजनीतिक परिवार के हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के सांसद हैं। अगर विधायकों की बात करें तो देशके 43 सौ से ज्यादा विधायकों में सिर्फ 20 विधायक हैं, जो ‘जेन जी’ के हैं। इनमें से आठ विधायक किसी न किसी राजनीतिक परिवार के हैं। इससे यह अंदाजा लग रहा है कि पहले भले राजनीतिक विरासत के बगैर भी नेता कामयाब हो जाते थे। लेकिन अब ऐसा होना ज्यादा मुश्किल होता जाएगा। अब राजनीतिक परिवार से बाहर के नौजवानों को राजनीति में कामयाब होने के लिए बहुत ज्यादा मशक्कत करनी पड़ेगी।
