रविशंकर प्रसाद ने इतनी देर से सफाई क्यों दी?

Categorized as राजनीति

भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब सीट के सांसद रविशंकर प्रसाद ने बांकीपुर विधानसभा सीट का चुनाव नतीजा आने के बाद सफाई दी। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि उन्होंने कभी भी यह नहीं कहा था कि भाजपा बांकीपुर से कुत्ते, बिल्ली को भी खड़ा कर देगी तो वह चुनाव जीत जाएगा। सोचें, जिस एक लाइन पर प्रशांत किशोर ने पूरा चुनाव कैम्पेन प्लान किया था और एक महीने तक प्रचार किया था, भाजपा के नेता कह रहे हैं कि वह बात ही झूठ है। तभी सवाल है कि जब यह बात झूठ है तो भाजपा या रविशंकर प्रसाद ने चुनाव प्रचार के दौरान इसका खंडन क्यों नहीं किया? चुनाव चल रहा था और इस बात की चर्चा हो रही थी, आम लोग भी कह रहे थे कि भाजपा का यह अहंकार तोड़ना है कि वह जिसको चाहेगी उसको खड़ा करके चुनाव जीत लेगी, उस समय भाजपा की ओर से यह सफाई क्यों नहीं दी गई?

कई जानकार खास कर सोशल मीडिया के जानकार और भाजपा के नेता भी इसे कम्युनिकेशन की कमजोरी बता रहे हैं। उनका कहना है कि हाल के दिनों में भाजपा की कम्युनिकेशन क्लैरिटी खऱाब हुई है। वह नैरेटिव नहीं बना रही है और निगेटिव नैरेटिव का जवाब भी नहीं दे पा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि जंतर मंतर पर हुए ‘जेन जी’ आंदोलन में भी ऐसा ही हुआ। इसके पीछे यह दलील दी जा रही है कि नई पीढ़ी सोशल मीडिया में ज्यादा सक्रिय है और उसके पास अपना एक इकोसिस्टम है। हो सकता है कि इस बात में कुछ सचाई हो कि भाजपा कम्युनिकेशन में पिछड़ रही है। कई लोग मानते हैं कि हीरेन जोशी प्रकरण के बाद से भाजपा की यह स्थिति बनी है। लेकिन बांकीपुर का मामला तो इससे अलग है। वह नई पीढ़ी के नैरेटिव बनाने का मामला नहीं है। वह विशुद्ध रूप से राजनीतिक मामला है, जो भाजपा के प्रतिद्वंद्वी प्रशांत किशोर ने बनाया था।

तभी ऐसा लग रहा है कि भाजपा असल में इस बात को साबित करना चाहती थी कि वह कुता, बिल्ली किसी के गले में भाजपा का पट्टा पहना कर बांकीपुर में उतारेगी और चुनाव जीत जाएगी। इसलिए उसने पूरे चुनाव में प्रशांत किशोर के बनाए इस नैरेटिव का जवाब नहीं दिया। उलटे भाजपा ने नीरज सिन्हा को उम्मीदवार बना कर यह मैसेज भी दिया कि प्रशांत किशोर के नैरेटिव को मजबूती मिले।

भाजपा के उम्मीदवार नीरज सिन्हा की कोई राजनीतिक हैसियत नहीं है। उनका कोई राजनीतिक प्रशिक्षण भी नहीं है। वे बहुत कम पढ़े लिखे हैं। उनको जनता से बात करना नहीं आता और वे पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे थे। उनके खिलाफ बहुत मजबूती से यह आरोप लगा कि शराबबंदी वाले प्रदेश में वे शराब की घर घर डिलीवरी के काम से जुड़े थे। इस बैकग्राउंड से पता चलता है कि भाजपा ने जान बूझकर ऐसा उम्मीदवार दिया था ताकि उसकी यह बात प्रमाणित हो कि वह जिसको चाहेगी उसके बांकीपुर से जिता लेगी। तभी चुनाव प्रचार के बीच न तो रविशंकर प्रसाद ने सफाई दी और न भाजपा के किसी दूसरे नेता ने सफाई दी। उलटे प्रचार के बीच भाजपा के एक नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि नीरज सिन्हा को इसलिए टिकट दिया गया ताकि उनके जैसे नेता से प्रशांत किशोर को हरवा दिया जाए। अगर पीके वैसे नेता से हारेंगे को मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेंगे। चुनाव प्रचार के दौरान सफाई इसलिए भी नहीं दी गई क्योंकि भाजपा मान रही थी कि वह इसके बावजूद चुनाव जीत जाएगी।


Previous News

More News

भाजपा नेताओं के बोलने पर रोक!

August 6, 2026

भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं के मुंह पर ताले लग गए हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी की ओर से उनको कहा गया है कि वे आउट ऑफ द टर्न बयान न दें। इसके बाद ही पार्टी के प्रवक्ता ज्यादा सक्रिय हुए। चढ़ावा चोरी से लेकर छात्रों के प्रदर्शन तक के मुद्दे पर…

विजय, ममता जैसा बनना है पीके को

August 6, 2026

बांकीपुर विधानसभा का उपचुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर का ग्राफ अचानक बहुत ऊंचा हो गया है। इसका कारण एक तो बांकीपुर सीट में ही छिपा है। यह सीट मिनी बिहार की तरह है। कोई भी जिला ऐसा नहीं होगा, जहां के लोग बांकीपुर में नहीं रहते हैं। ज्यादातर लोग सरकारी या गैर सरकारी नौकरी…

चुनाव से पहले पंजाब में छापे

August 6, 2026

अगले साल के शुरू में पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इन पांच में से चार राज्य भाजपा शासित हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भाजपा की सरकार है। एकमात्र पंजाब है, जहां विपक्ष की आम आदमी पार्टी की सरकार है। बाकी चार राज्यों में, जहां चुनाव हैं वहां शांति…

दिल्ली यूनिवर्सिटी में सैकड़ों सीटें खाली हैं

August 6, 2026

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए अखिल भारतीय स्तर पर सीयूईटी यानी सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेस टेस्ट शुरू कराने की परिणति यह है कि दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थान में भी सीटें खाली रह जा रही हैं। इस साल अभी तक कई राउंड की काउंसिलिंग हो चुकी है और सैकड़ों सीटें खाली हैं। अदिति कॉलेज में छह…

गृह मंत्रालय के अंतर्विरोधी आदेश, एवं कानून

August 6, 2026

यदि वह आदेश और यह बिल पढ़ें, तो हैरत होगी! मानो शासन को अपने ही आदेश और कानून का अंतर्विरोध समझने की बुद्धि नहीं है। अथवा कहना होगा कि उन्हें न तो राष्ट्रगान, न ही राष्ट्रगीत के सम्मान की परवाह है। बल्कि, किसी बहाने बस विपक्षी नेताओं को नीचा दिखाने की चाह रही है।… सोचें…

logo