भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं के मुंह पर ताले लग गए हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी की ओर से उनको कहा गया है कि वे आउट ऑफ द टर्न बयान न दें। इसके बाद ही पार्टी के प्रवक्ता ज्यादा सक्रिय हुए। चढ़ावा चोरी से लेकर छात्रों के प्रदर्शन तक के मुद्दे पर संबित पात्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू हुई। असल में भाजपा के कई नेताओं के बयानों से पार्टी का कोर वोट बैंक नाराज हो रहा था। भाजपा के बड़े नेता भी असहज हो रहे थे। इनमें कंगना रनौत भी एक सांसद हैं, जिनके बयानों ने पिछले कुछ दिनों में बड़ी हलचल मचाई। उन्होंने ‘जेन जी’ को लेकर जो बयान दिया उससे भाजपा को नुकसान हुआ। ऊपर से लोगों ने उनकी पुरानी पोस्ट, वीडियो आदि निकाल कर शेयर किए और उनके संस्कारों पर सवाल उठाया। इससे वे खुद भी बैकफुट पर आईं और पार्टी को भी उनके बयानों के बारे में सोचना पड़ा।
जानकार सूत्रों का कहना है कि पार्टी की ओर से उनको कहा गया है कि बिना मंजूरी के बयान न दें। हालांकि सामान्य बातें कहने पर रोक नहीं है। लेकिन नीतिगत मामलों मे या संवेदनशील राजनीतिक मामलों में उनको अपनी सोशल मीडिया पोस्ट पार्टी के मीडिया विभाग से मंजूर करानी होगी। इसी तरह फिल्मों से जुड़े एक दूसरे सांसद रवि किशन को भी चुप रहने को कहा गया है। तभी उन्होंने संसद परिसर में कहा कि वे कुछ दिन मौन रखेंगे। हालांकि शब्दों के गलत उच्चारण के लिए कुख्यात रहे रवि किशन यहां भी गलत बोल गए। उन्होंने मौन व्रत को ‘मौन वत्र’ कह दिया। इसका अलग मजाक बना। एक अन्य फिल्मी सांसद मनोज तिवारी ने बिहार के बांकीपुर में जाकर जो प्रचार किया था उसे लेकर वे भी निशाने पर हैं। कहा जा रहा है कि ऐसे अनेक सांसदों को कम से कम संसद सत्र के दौरान चुप रहने को कहा गया है।
