सिर्फ 14 साल पहले तक यानी मार्च 2012 तक बहुजन समाज पार्टी उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार चला रही थी। आज यह स्थिति हो गई कि उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यों की विधानसभा में अब उसका एक भी सदस्य नहीं था। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा को सिर्फ एक सीट मिली थी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में बलिया की रसरा सीट से उमाशंकर सिंह चुनाव जीते थे। हालांकि वह उनकी निजी जीत थी। फिर भी वे बसपा के साथ बने रहे थे। अब उनका दुखद निधन हो गया है। वे कैंसर से पीड़ित थे और बुधवार को खबर आई कि वे कैंसर से जंग हार गए। उनके निधन के बाद उत्तर प्रदेश मे अब बसपा बिना विधायक के है।
पिछले तीन दशक में यह पहला मौका है, जब बहुजन समाज पार्टी का उत्तर प्रदेश में एक भी विधायक नहीं है। उसके पास लोकसभा में भी कोई सांसद नहीं है और रामजी गौतम के रिटायर होने के बाद राज्यसभा में भी कोई सांसद नहीं होगा। ऐसा नहीं है कि सिर्फ उत्तर प्रदेश में बसपा बिना विधायक के हो गई है। अब देश के ज्यादातर राज्यों में बसपा बिना विधायक के है। एक समय आधा दर्जन राज्यों में बसपा के विधायक होते थे। लेकिन अब राजस्थान, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में बसपा के पास कोई विधायक नहीं है। बिहार में जरूर बसपा के एक विधायक हैं। देखना होगा कि वे कब तक पार्टी के साथ रहते हैं। वैसे अगले साल के शुरू में विधानसभा का चुनाव है। देखना होगा कि बसपा का खाता खुलता है या नहीं?
