वेदांता के मालिक अनिल अग्रवाल चुप नहीं बैठ रहे हैं। एक तरफ उनको घेरने और कमजोर करने के प्रयासों की खबर आ रही है तो दूसरी ओर वे नया मोर्चा खोल रहे हैं। पिछले दिनों छत्तीसगढ़ में वेदांता के थर्मल पावर प्लांट में विस्फोट हो गया था, जिसमें 25 लोगों की मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ तो नाम लेकर अनिल अग्रवाल को आरोपी बनाया गया। कई कारोबारी हस्तियों ने इस पर सवाल उठाए। अब खुद अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया में एक लंबी पोस्ट लिख कर एक नया मोर्चा खोला है। उन्होंने लिखा है कि इस प्लांट में उन्होंने सर्वोच्च सावधानी बरती। उन्होंने लिखा कि हिंदुस्तान की सबसे भरोसेमंद कंपनी एनटीपीसी और जीई की साझेदारी वाली एनजीएसएल को इस प्लांट की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा था।
उन्होंने और कई बातें लिखी है। अनिल अग्रवाल ने अपने युवा बेटे अग्निवेश की मौत और 25 मजदूरों की मौत को एक साथ जोड़ा है। सबको परिवार का सदस्य बताया है। यह भी लिखा है कि सबको मुआवजा मिल चुका है। लेकिन एनटीपीसी को सुरक्षा का काम आउटसोर्स किए जाने की बात का जिक्र करके उन्होंने बताया है कि उनका प्लांट का देखभाल भारत सरकार की कंपनी कर रही थी। गौरतलब है कि इससे पहले उन्होंने जेपी एसोसिएट्स की बिक्री वाले प्रकरण में खुल कर अपनी राय रखी थी। सोशल मीडिया में पोस्ट के जरिए उन्होंने बताया कि कैसे जेपी गौड़ चाहते थे कि जेपी एसोसिएट्स वे खरीदें और उन्होंने इसके लिए उन्होंने बोली भी लगाई थी। अनिल अग्रवाल ने बताया कि उनकी बोली सबसे बड़ी थी फिर भी उसे खारिज कर दिया गया। उन्होंने इसे अदालत में चुनौती भी दी लेकिन वहां से भी उनको निराशा हाथ लगी। इसके बाद उनके ऊपर हमले बढ़ गए।
