अनिल अग्रवाल का साहस बडा देर से लौटा!

Categorized as राजनीति

वेदांता समूह के मालिक अनिल अग्रवाल पहली पीढ़ी के कारोबारी हैं और खरबपति हैं। बिहार के पटना से निकल कर उन्होंने लंदन तक का लंबा सफर किया है। वे देश के बड़े और प्रतिष्ठित उद्योगपति हैं और बिहार छोड़ कर देश के अनेक राज्यों में उनके उद्योग और कारोबार हैं। उन्होंने दुनिया की जानी मानी कंपनी फॉक्सकॉन के साथ मिल कर गुजरात में सेमींकंडक्टर का साझा उद्यम लगाया है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहेते उद्योगपतियों में माने जाते रहे हैं या यह भी कह सकते हैं कि अपनी तरफ से उन्होंने बहुत कोशिश की है कि वे चहेते बने रहें। वे उस छोटे से समूह में शामिल होने की कोशिश करते रहे, जिसे देश के सारे प्राकृतिक और मानवीय संसाधन सौंपे जा रहे थे। इसी उम्मीद में वे मुंह पर ताला लगाए रहे। अब जाकर उनका साहस लौटा है। उन्होंने जेपी एसोसिएट्स के मामले में अपनी कंपनी की बोली खारिज होने पर सवाल उठाया है। लेकिन तब तक बहुत देर हो गई है।

उन्होंने गीता के 15वें अध्याय का हवाला देकर एक लंबी पोस्ट लिखी है, जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे जेपी एसोसिएट्स के मालिक जेपी गौड़ उनके पास लंदन आए थे और कहा था कि वे चाहते हैं कि उनका शुरू किया हुआ कारोबार कोई सक्षम व्यक्ति संभाले। इसी आधार पर अनिल अग्रवाल ने जेपी एसोसिएट्स की बोली लगाई। उनकी बोली 16,726 करोड़ रुपए की थी। उनको सबसे बड़ा बोली लगाने वाले घोषित भी किया गया था। लेकिन बाद में 14,535 करोड़ रुपए की बोली लगाने वाले अडानी समूह को जेपी एसोसिएट्स का मालिकाना बेच दिया गया। अडानी समूह की बोली वेदांता के मुकाबले 2,191 करोड़ रुपए कम थी। इसके बावजूद अडानी समूह की जीत हुई। कहा जा रहा है कि वेदांता समूह की बोली भले बड़ी थी लेकिन वे सिर्फ दो हजार करोड़ रुपए नकद दे रहे थे, जबकि अडानी समूह ने छह हजार करोड़ रुपए नकद देने का प्रस्ताव रखा। यह भी कहा जा रहा है कि वेदांता समूह पहले भी कुछ मामलों में बोली लगाने के बाद पीछे हट गया था। इस वजह से कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स ने उनकी बजाय अडानी समूह की बोली स्वीकार की।

अब सवाल है कि अनिल अग्रवाल जब अभी तक दिवालिया संहिता के तहत होने वाले सौदों पर चुप रहे थे तो अब क्यों उन्होंने इस पर सवाल उठाए हैं? उनका साहस कैसे लौटा है? क्या अपने इकलौते बेटे की असमय हुई मौत ने उनके अंदर वैराग्य का भाव भर दिया है और उसी वैराग्य से उनका साहस लौटा है? ध्यान रहे कुछ समय पहले एक दुर्घटना में घायल हुए उनके बेटे का निधन हुआ है। उनेते बेटे अग्निवेश अग्रवाल न्यूयॉर्क में स्कीइंग करते समय घायल हुए थे। बहरहाल, अब अनिल अग्रवाल को गीता की याद आई है और उनका साहस भी लौटा है। उन्होंने गीता के 15वें अध्याय के हवाले से लिखा है, ‘साहस रखो, विनम्र रहो, बिना किसी मोह के अपना कर्तव्य निभाओ’। इसके बाद साहस दिखाते हुए उन्होंने जेपी गौड़ के साथ अपने संबंध और उनकी कंपनी टेकओवर करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से लिखा। भाजपा, नरेंद्र मोदी और अडानी विरोधी खेमे का समर्थन उनको मिलने लगा है लेकिन उसी अनुपात में भाजपा इकोसिस्टम के लोग उनकी कमियां बताने में भी लग गए हैं। मीडिया में सरकारी सूत्रों के हवाले से उनकी साख पर सवाल उठाए जा रहे हैं। बहुत जल्दी भक्त मंडली उनकी विलेन की छवि बना डालेगी।


Previous News Next News

More News

ज्ञानेश के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन

September 26, 2026

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुक्रवार, 25 सितंबर को कांग्रेस पार्टी ने पूरे देश में प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने सभी राज्यों की राजधानी में शुक्रवार को मार्च निकाला और प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। गौरतलब है कि एक दिन पहले गुरुवार को नेता प्रतिपक्ष…

नेहा बोरा जंतर मंतर पहुंची, सीजेपी का प्रदर्शन टला

September 26, 2026

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने पहले तो 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था लेकिन अब उसे आगे बढ़ा दिया गया है। सीजेपी के नेताओं ने कहा है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो सीजेपी दो अक्टूबर से देश भर में प्रदर्शन करेगी। पहले सीजेपी के संस्थापक…

सुप्रीम कोर्ट और बॉम्ब हाई कोर्ट में याचिका

September 26, 2026

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मनमाने तरीके से चुनाव आयोग को चलाने के ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के खुलासे के बाद अब मामला अदालत में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर की है तो दो याचिकाएं बॉम्बे हाई कोर्ट में दर्ज की गई हैं। दोनों अदालतों में दायर याचिकाओं…

भाजपा की दो सहयोगी पार्टियों ने उठाए सवाल

September 26, 2026

नई दिल्ली। देश की विपक्षी पार्टियां तो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ऊपर हमला कर ही रही हैं अब दो सहयोगी पार्टियों ने भी सवाल उठाए हैं। बिहार की दो सहयोगी पार्टियों के नेताओं ने चुनाव आयोग से ज्यादा स्पष्टता से अपनी बात रखने को कहा है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पहले यह…

ज्ञानेश कुमार के कार्यक्रम स्थगित

September 26, 2026

नई दिल्ली। अंग्रेजी के अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के खुलासे के तीन दिन हो गए हैं। लेकिन अभी तक मुख्य चुनाव आयुक्त या दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। चुनाव आयोग की ओर से एक नोट जरूर जारी हुआ लेकिन जिन दो चुनाव आयुक्तों की 14 आपत्तियों…

logo