बिहार की राजनीति में यह लाख टके का सवाल है कि नीतीश कुमार के बेटे निशांत का आगे क्या होगा? वे सक्रिय राजनीति में आ चुके हैं। उन्होंने पार्टी ज्वाइन कर ली है। उनके सामने ऑफऱ थी कि वे भाजपा के नेता सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बन रही नई सरकार में डिप्टी सीएम के तौर पर शामिल हो जाएं। उनके लिए मंत्रालय भी तय कर दिया गया था। लेकिन ऐन मौके पर वे पीछे हट गए। उन्होंने सरकार में शपथ लेने की बजाय पार्टी के लिए काम करने की इच्छा जताई। लेकिन यह असल कारण नहीं है। वे सरकार में शामिल होकर भी पार्टी का काम कर सकते थे।
उनकी पार्टी के नेताओं का मानना है कि ज्यादा अच्छा होता अगर वे डिप्टी सीएम होकर पार्टी संभालते क्योंकि इससे उनकी ऑथोरिटी बनती। अब नीतीश कुमार की सेहत ठीक नहीं है और निशांत की कोई ऑथोरिटी बनती है तो जनता दल यू के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यह चिंता भी जताई जा रही है कि अगर 20 साल राज करने के बाद नालंदा और कुर्मी के हाथ से शासन की बागडोर निकली है तो कम से कम किसी कुर्मी को डिप्टी सीएम तो होना चाहिए। तभी इस बात का प्रयास शुरू हो गया है कि मई के पहले हफ्ते में जब मंत्रिमंडल का विस्तार हो तो उसी समय निशांत को सरकार में शामिल करा दिया जाए। दूसरी ओर असलियत यह है कि निशांत का कॉन्फिडेंस ऐसा नहीं दिख रहा है कि वे सरकार में शामिल हों। असल में उनकी उम्र 50 साल हो गई है और अभी तक उन्होंने कुछ नहीं किया है। न नौकरी, न कारोबार, न राजनीति, न समाजसेवा कुछ नहीं किया है। इसलिए उनके सामने समस्या है और यह समस्या मामूली नहीं है।
