‘विपक्ष का परिसीमन नहीं, एससी-एसटी की सीटों में वृद्धि का विरोध’, अमित शाह की दो टूक

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और ‘परिसीमन’ पर हुई चर्चा का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर इस चर्चा को कोई ध्यान से सुनेगा तो महिला आरक्षण के लिए जो संविधान संशोधन है, उसका किसी ने विरोध नहीं किया है। सभी ने कहा कि यह संविधान संशोधन जो आया है, उसका हम स्वागत करते हैं, लेकिन इंडिया महागठबंधन के सभी सदस्यों ने स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण का विरोध किया है।

उन्होंने कहा कि इन तीन बिलों का पहला उद्देश्य महिला सशक्तिकरण करने वाले संविधान सुधार को समयबद्ध तरीके से लागू कर 2029 का चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराया जाए। दूसरा उद्देश्य एक व्यक्ति- एक वोट- एक मूल्य… यह सिद्धांत जो हमारे संविधान के मूल में है, जिसे संविधान सभा ने तय किया था, उस संविधान की स्पिरिट (मूल भावना) को लागू किया जाए।

लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि परिसीमन का विरोध करने वाले वास्तव में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की सीटों में वृद्धि का विरोध कर रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण पर किसी ने आपत्ति नहीं जताई है, लेकिन अगर हम गौर से देखें तो इंडिया महागठबंधन के सभी सदस्यों ने ‘अगर-मगर’ का इस्तेमाल करते हुए इसका विरोध किया है।

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अमित शाह ने कहा कि इस महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक पर सदन में लगभग 133 सदस्यों ने अपनी बात रखी, जिनमें से 56 महिलाएं थीं, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है।

उन्होंने कहा कि कई सारे सदस्यों ने अनेक प्रकार की आशंकाएं व्यक्त कीं कि परिसीमन अभी क्यों लाया जाए? तो मैं बता दूं कि जो नारी शक्ति वंदन अधिनियम आया है, उसमें जिक्र है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद जो परिसीमन होगा, उसमें महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।

अब ये कहते हैं कि बिल लाते समय ऐसा जिक्र क्यों किया गया? यह हमने नहीं किया। 1971 में इंदिरा गांधी की सरकार थी, तब वह ऐसा निर्धारित करके गई थीं, जिसके कारण हमें इसका जिक्र करना पड़ा। हमारे संविधान में समय-समय पर परिसीमन का प्रावधान किया गया है। परिसीमन से ही एससी और एसटी, जिनकी संख्या बढ़ती है, उनकी सीटें बढ़ने का भी प्रावधान है। एक प्रकार से जो परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वह एससी/एसटी सीटों की बढ़ोतरी का भी विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर 45 लाख मतदाताओं का एक प्रतिनिधि है, और कुछ स्थानों पर छह लाख मतदाताओं का एक प्रतिनिधि है। परिणामस्वरूप, प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में प्रत्येक वोट का मूल्य समान नहीं है।

अमित शाह ने लोकसभा में कहा, “मैं उन्हें आश्वस्त करता हूं कि अगर वे (विपक्ष) परिसीमन के लिए हमारा समर्थन करते हैं तो प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में प्रत्येक वोट का मूल्य समान होगा।

Pic Credit : ANI


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