राहुल के ‘गद्दार दोस्तों’ की लंबी सूची

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यह सबके लिए बहुत हैरानी की बात थी कि राहुल गांधी ने रवनीत सिंह बिट्टू को क्यों टारगेट किया? यह राहुल गांधी का सार्वजनिक आचरण के बिल्कुल उलट था और राजनीतिक रूप से नुकसानदेह भी था। आमतौर पर कहा जा रहा है कि राहुल गांधी किसी के एकाध नेताओं को छोड़ कर बाकी के प्रति मन में कोई दुर्भावना नहीं रखते हैं। उनको पता है कि अगर कभी कांग्रेस के हातात सुधरे तो उनको छोड़ कर गए अनेक लोग वापस लौटेंगे। तभी जब उन्होंने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार दोस्त’ कहा तो वह हैरान करने वाला था। बिट्टू के लिए भी बहुत सदमे वाली बात थी। लेकिन तुरंत ही उन्होंने कहा कि देश विरोधियों से उनका कोई लेना देना नहीं है। कांग्रेस के कई जानकार नेता मान रहे हैं कि राहुल अपने करीबी लोगों के उकसावे में आ गए और मजे लेने के लिए यह बात कह दी।

कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि जरनल एमएम नरवणे वाली किताब को लेकर राहुल गांधी ने जिस तरह से भाजपा नेतृत्व को घेरा है उससे वे खुद बहुत खुश हैं। ऊपर से उनके आसपास के लोगों ने उनमें ऐसी हवा भरी है कि वे संसद की सीढ़ियों पर खढ़े खड़े उड़ रहे थे। इसी मस्ती में उन्होंने रवनीत सिंह बिट्टू पर कमेंट कर दिया। उनको भी अफसोस हो रहा होगा। उनके करीब रहे एक नेता ने बाद में अनौपचारिक बातचीत में कहा कि अगर राहुल गांधी ऐसे लोगों की सूची बनाने बैठें, जिनको उन्होंने आगे बढ़ाया और जब उनको जरुरत पड़ी तो वे लोग छोड़ कर चले गए तो वह सूची बहुत लंबी हो जाएगी। राहुल की टीम में उनके साथ रहे एक व्यक्ति ने कहा कि राहुल कभी भी उनकी गिनती नहीं करते थे, जो उनको छोड़ गए हैं। कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं में अगर किसी के प्रति उनके मन में कोई नाराजगी है तो वह हिमंत बिस्वा सरमा हैं। लेकिन खुद राहुल ही मानते हैं कि सरमा को आगे बढ़ाने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। फिर भी राहुल की दिली इच्छा है कि एक बार असम में कांग्रेस जीते और सरमा को उनके बड़बोलेपन का जवाब मिले।

बहरहाल, राहुल ने जब से रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार दोस्त’ कहा तब से ऐसे नेताओं का सूची बनाई जा रही है, जिनको राहुल गांधी ने आगे बढ़ाया। कांग्रेस कवर करने वाले पत्रकार भी ऐसी सूची बना रहे हैं। यह सूची दो तरह की है। एक सूची ऐसे युवा नेताओं की है, जो किसी न किसी बड़े नेता के बेटे हैं, जिनको राहुल ने चुन कर आगे बढ़ाया और दूसरी सूची ऐसे नेताओं की है, जो किसी बड़े नेता के बेटे नहीं हैं और उनको राहुल ने आगे बढ़ाया। इन सूचियों में एक बड़ा अंतर यह दिखता है कि बड़े नेताओं के बेटों ने यानी जो पहले से सत्ता का सुख भोग रहे थे उन्होंने ज्यादा जल्दी पाला बदला। यानी राहुल के शब्दों में कहें तो उनमें से ज्यादा ने और ज्यादा जल्दी ‘गद्दारी’ की।

ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, मिलिंद देवड़ा, सुष्मिता देब, अशोक चौधरी जैसे अनेक नाम इस सूची में हैं। लेकिन कभी भी राहुल गांधी इन लोगों के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं देते हैं। अशोक तंवर भी छोड़ कर गए लेकिन उनकी वापसी हो गई है। सुखदेव भगत की भी वापसी हो गई है। प्रदीप जैन आदित्य को भी राहुल ने मंत्री बनवाया था यूपी की लगातार हार के बाद भी वे कांग्रेस के साथ हैं। राहुल ने ‘गद्दार दोस्त’ जुमले बोला इसलिए सिर्फ युवा नेताओं पर बात हो रही है। अन्यथा पार्टी तो अमरिंदर सिंह जैसे बुजुर्ग भी छोड़ कर चले गए। बहरहाल, अब जो दोस्त बचे हैं उनको बचाए रखना राहुल गांधी की बड़ी चुनौती है।


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