भारत में हमेशा राजनीतिक लड़ाइयों की चर्चा होती है। पार्टियों के बीच कैसा मुकाबला चल रहा है और कहां चुनावी लड़ाई में कौन आगे है इससे सब परिचित होते हैं। लेकिन कॉरपोरेट वॉर की चर्चा होती ही नहीं है। होती भी है तो बड़े सतही स्तर पर होती है। मीडिया में भी इसकी चर्चा बहुत कम होती है। इसलिए लोगों को पता नहीं होता है। वेदांता समूह का मामला सबके सामने है। जब उसके मालिक अनिक अग्रवाल ने अडानी समूह को चुनौती दी तब लोगों को इसकी कुछ जानकारी हुई।
उसके बाद उनकी कंपनी में विस्फोट का संयोग और उनके ऊपर एफआईआर दर्ज होने का मामला सामने आया। उधर स्टार्ट अप के तौर पर उभरी कंपनी लेंसकार्ट को लेकर जो विवाद शुरू हुआ है उसकी चर्चा सिर्फ सोशल मीडिया में है।
लेंसकार्ट के मालिक पीयूष बंसल और उनकी पत्नी निधि मित्तल को मुस्लिम बताया जा रहा है। कंपनी के एक इंटरनल ऑर्डर के दिशानिर्देश के आधार पर दावा किया जा रहा है कि कंपनी अपने कार्यालयों में तो बुरका और हिजाब की अनुमति दे रही है लेकिन तिलक लगाने और कलावा बांधने पर रोक लगा रही है। इसके साथ ही यह भी खबर है कि अंबानी समूह इस कंपनी का अधिग्रहण करने की तैयारी कर रहा है।
टाटा समूह की समस्याएं भी कई स्तर पर हैं।
एक तो समस्या ट्रस्ट के सदस्यों को लेकर है। गैर पारसी सदस्यों को हटाया जा रहा है तो दूसरी ओर यह मांग भी उठ रही है कि सरकार सदस्य नियुक्त करे। उधर नासिक में टीसीएस के अंदर कथित धर्म परिवर्तन और हिंदू पेशेवर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न का मामला बहुत उछाला गया, जिसके बाद कंपनी की साख और उसके कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
