पश्चिम बंगाल में सब कुछ अभूतपूर्व हो रहा है। पहली बार ऐसा हुआ कि मतदान के लिए प्रचार समाप्त होने और साइलेंट पीरियड शुरू होने तक मतदाता सूची में नाम जोड़े गए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि तार्किक विसंगति के आधार पर जिन 27 लाख लोगों के नाम कटे हैं उनके नाम जैसे जैसे ट्रिब्यूनल से क्लीयर हों वैसे वैसे उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जाए और पूरक मतदाता सूची जारी की जाए। सर्वोच्च अदालत ने पहले चरण के लिए यह सीमा 21 अप्रैत तक तय की थी और दूसरे चरण के लिए 27 अप्रैल तक की सीमा है। दूसरे चरण का चुनाव 29 अप्रैल को होने वाला है। इससे पहले नामांकन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही मतदाता सूची फ्रीज कर दी जाती थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से इस बार अभूतपूर्व काम हुआ फिर भी लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से छूट गए। पहले चरण की 152 सीटों के लिए चुनाव प्रचार मंगलवार, 21 अप्रैल की शाम पांच बजे समाप्त हो गया। इससे एक दिन पहले सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि 27 लाख नामों पर विचार के लिए जो 19 ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं वो काम ही नहीं कर रहे हैं। यह भी कहा गया कि उसमें वकीलों को नहीं पेश होने दिया जा रहा है और कई जगह तो सिर्फ ऑनलाइन दर्ज आपत्तियों पर ही सुनवाई की जा रही है। ध्यान रहे पहले खबर आई थी कि ट्रिब्यूनल का काम शुरू होने के बाद कई दिन तक ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था ही नहीं बनी थी। सो, सुप्रीम कोर्ट के तमाम सद्भाव के बावजूद चुनाव आयोग ने लाखों मतदाताओं के नाम छोड़ दिए। अनके ऐसे लोगों के नाम कटे हैं, जिनका नाम 2002 की एसआईआऱ में शामिल था और वे लगातार वोट देते रहे थे।
