हार की ईमानदार समीक्षा नहीं

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विधानसभा चुनाव के नतीजों के तीन दिन बाद सोमवार, 17 नवंबर को राष्ट्रीय जनता दल ने हार की समीक्षा की। सभी हारे हुए उम्मीदवारों को पटना बुलाया गया और उनसे बात की गई। जीते विधायकों के साथ भी समीक्षा हो रही है। इसके बाद मंगलवार को कांग्रेस पार्टी समीक्षा करेगी। लेकिन उससे पहले राजद की समीक्षा से अंदाजा हो गया है कि कोई ईमानदार बातचीत नहीं होने वाली है। सभी उम्मीदवारों ने समझ लिया है कि पार्टी के नेता क्या सुनना चाहते हैं। वे उसी हिसाब से हार के कारण बता रहे हैं। असल में चुनाव नतीजों के बाद राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने सोशल मीडिया में एक पोस्ट डाल कर लंबी चौड़ी समीक्षा की है। उन्होंने जो लिखा है उसका लब्बोलुआब है कि दुनिया में कहीं भी 90 फीसदी स्ट्राइक रेट नहीं होती है और इसको सही नहीं माना जा सकता है। उधर राहुल गांधी ने खुद ही कह दिया है कि चुनाव पहले दिन से निष्पक्ष नहीं था।

तभी महागठबंधन की दोनों बड़ी पार्टियों राजद और कांग्रेस के नेता चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं। हर उम्मीदवार के पास किसी न किसी किस्म की गड़बड़ी के कथित सबूत हैं। कहीं जीवित लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए जाने का सबूत दिया जा रहा है तो कहीं मृत लोगों के वोट डालने के सबूत हैं। कई उम्मीदवार अदालत जाने की तैयारी कर रहे हैं और राजद की ओर से कानूनी मदद मुहैया कराने की तैयारी की जा रही है। पार्टी के तौर पर राजद या कांग्रेस की ओर से मुकदमा नहीं लड़ा जाएगा लेकिन कई कम अंतर से हारजीत वाली सीटों पर चुनौती दी जाएगी। राजद की समीक्षा का निष्कर्ष यह बताया जा रहा है कि महागठबंधन के इतनी बुरी तरह से हारने का कोई कारण नहीं है और इसलिए इस चुनाव में गड़बड़ी की गई है। गड़बड़ी कैसे की गई है इसके पुख्ता सबूत भी नहीं हैं लेकिन संदेह है।

संदेह बढ़ाने के लिए कुछ आंकड़े निकाले जा रहे हैं। मिसाल के तौर पर राजद के एक उम्मीदवार ने पार्टी के बड़े नेताओं के सामने बिहार के दोनों उप मुख्यमंत्रियों सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को मिले वोट का आंकड़ा पेश किया। सम्राट चौधरी को 1,22,480 वोट मिले हैं, जबकि विजय सिन्हा को 1,22,408 वोट मिले हैं। इनमें सभी छह अंक समान हैं। आखिरी तीन अंक में एक में जीरो बीच में है और दूसरे में जीरो अंत में है। इस आधार पर कहा जा रहा है कि ईवीएम पहले से प्रोग्राम किया हुआ था और उसमें नंबर फीड किए हुए थे। हालांकि यह सिर्फ संयोग है क्योंकि ज्यादा अंतर से जीते अधिकतर उम्मीदवारों को इसी के आसपास वोट मिले हैं। फिर भी ऐसे ही आंकड़ों और ऐसी ही बातों को सबूत के तौर पर पेश किया जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि महागठबंधन को चुनाव हरवाया गया है। राजद और कांग्रेस के नेता जीत हार के बड़े अंतर का भी मुद्दा बना रहे हैं। हालांकि उसका भी ठोस आधार नहीं है क्योंकि इस बार 10 फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है इसलिए आंकड़े बढ़ने ही थे। वैसे भी लोकसभा चुनाव में एनडीए को 47 फीसदी वोट मिला था, जो इस बार थोड़ा बढ़ गया है। तभी अगर विपक्षी पार्टियां नतीजों की ईमानदार समीक्षा नहीं करेंगी और अपनी कमजोरी का पता नहीं लगाएंगी, तब तक उनका कुछ नहीं हो सकता है।


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