लालू पोस्टर से गायब हैं पर प्रचार कर रहे हैं

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बिहार में महागठबंधन और खास कर राष्ट्रीय जनता दल का प्रचार बहुत दिलचस्प हो गया है। तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और महागठबंधन ने उनको मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित किया है। उनका कुनबा बहुत बड़ा है। वे नौ भाई बहन हैं और माता, पिता भी अभी सक्रिय हैं। इसके अलावा कई मामा, चाचा और दूसरे रिश्तेदार भी हैं। लेकिन प्रचार उनको अकेले करना पड़ रहा है। मामाओं से पहले झगड़ा हो चुका है। साधु यादव और सुभाष यादव दोनों विरोध में ही बयान देते रहते हैं। इसके बाद भाई से विवाद हुआ और झगड़ा इतना बढ़ गया कि तेज प्रताप यादव अलग पार्टी बना कर चुनाव लड़ रहे हैं और अपनी पार्टी को लालू प्रसाद यादव की असली पार्टी बता रहे हैं। उन्होंने तेजस्वी के खिलाफ भी उम्मीदवार उतारा है और तेजस्वी भी उनके खिलाफ प्रचार करने गए थे। दो बहनें मीसा भारती और रोहिणी आचार्य राजनीति में हैं लेकिन प्रचार बहुत सीमित है।

सोचें, तेजस्वी यादव को भाजपा और स्वंय प्रधानमंत्री वंशवादी राजनीति का बिहार का सबसे बड़ा चेहरा बता कर प्रचार कर रहे हैं और चेहरे के आसपास वंश का कोई दिखाई ही नहीं देता है। यह और भी दिलचस्प है कि तेजस्वी यादव ने जान बूझकर अपने माता, पिता यानी लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को मुख्यधारा के प्रचार से हटा दिया है। दोनों राजद के पोस्टर, होर्डिंग से भी गायब हैं। तेजस्वी को लग रहा है कि ये दोनों दिखाई नहीं देंगे तो 2005 से पहले का बिहार यानी इन दोनों के शासन के बिहार का नैरेटिव नहीं बन पाए। लेकिन इसका यह भी मैसेज बन रहा है कि जब तेजस्वी का परिवार में ही इतना झगड़ा है या वे परिवार को ही साथ लेकर नहीं चल पा रहे हैं तो बिहार का क्या करेंगे? बहरहाल, इस नैरेटिव के बीच लालू प्रसाद इधर उधर प्रचार के लिए जाने लगे हैं। वे पटना की दीघा सीट पर सीपीआई माले की दिव्या गौतम के लिए और दानापुर में राजद के रीतलाल यादव के लिए गाड़ी में बैठे बैठे रोड शो किया। रीतलाल यादव के लिए रोड शो करके लालू ने अनंत सिंह के लिए ललन सिंह और सम्राट चौधरी के रोड शो पर बनने वाले राजद के नैरेटिव को ही पंक्चर कर दिया।


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