नई दिल्ली। छह साल पहले हुए दिल्ली दंगों के दौरान आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए ताहिर हुसैन को अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। आम आदमी पार्टी के पार्षद रहे ताहिर हुसैन को अदालत ने 13 जुलाई को दोषी ठहराया था। शुक्रवार, 31 जुलाई को अदालत ने सजा का ऐलान किया। 2020 में हुए दंगे के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या हुई थी। इस मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
अदालत ने सजा का ऐलान करते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर वारदात थी, जिसने समाज को झकझोर दिया। इससे पहले कोर्ट ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन के साथ साथ नाजिम, काशिम, अनस और जावेद को हत्या, अपहरण, दंगा और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का दोषी ठहराया था। अदालत ने 11 आरोपियों में से छह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
पुलिस ने अपने आरोपपत्र में कहा था कि ताहिर हुसैन हथियारों से लैस उस भीड़ का हिस्सा थे, जो हिंदुओं के प्रति नफरत के कारण दंगा, आगजनी और लूटपाट करने के लिए इकट्ठा हुई थी। भीड़ ने बेरहमी से और लगातार हमला करके अंकित शर्मा की हत्या कर दी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले को दुर्लभतम बताते हुए कोर्ट में कहा था, ‘आरोपियों ने सारी हदें पार कर दीं। अंकित की मौत होने के बाद भी उन पर हमला जारी रखा गया। यह बेहद क्रूर और सुनियोजित हत्या थी। इसलिए दोषियों को फांसी की सजा दी जाए’।
दूसरी ओर ताहिर हुसैन के वकील ने दलील दी थी कि हर हत्या के मामले में मौत की सजा नहीं दी जा सकती। किसी भी दोषी की अलग अलग भूमिका साफ नहीं बताई गई। उन्होंने कहा था कि यह मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में नहीं आता है। गौरतलब है कि दिल्ली दंगा 23 फरवरी, 2020 को शुरू हुआ था। 25 फरवरी को आईबी अफसर अंकित शर्मा घर से बाहर निकले थे, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं आए। परिवार उनकी तलाश कर रहा था। बाद में उनका शव चांदबाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले में बरामद हुआ।
