संसद में एसआईआर पर हंगामा

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नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हंगामे के साथ हुई है। पहले दिन सोमवार को कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर पर जम कर हंगामा किया। संसद की पहले दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के चैम्बर में विपक्षी पार्टियों की बैठक हुई, जिसमें एसआईआर का मुद्दा उठाने पर सहमति बनी। इसके बाद कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा में विपक्ष ने हंगामा किया। राज्यसभा में नए सभापति, उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत हुआ। उसके बाद हंगामा शुरू हुआ। दोनों सदनों को कई बार के स्थगन के बाद दो बजे दिन में मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

विपक्षी पार्टियां एसआईआर पर चर्चा के लिए अड़ा है। दूसरी ओर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में बताया कि सरकार एसआईआर और चुनावी सुधारों पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने साथ ही कहा कि विपक्ष इस पर कोई समय सीमा न थोपे। सरकार के जानकार सूत्रों का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने पर सरकार सदन में इस पर 10 घंटे चर्चा करा सकती है। यह बहस गुरुवार और शुक्रवार को हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इसमें हिस्सा ले सकते हैं।

पहले दिन लोकसभा में प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्य वेल में आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष से सदन चलने देने की अपील की। हालांकि, विपक्ष के सदस्यों पर स्पीकर की इस अपील का कोई असर नहीं हुआ और हंगामे के बीच ही कार्यवाही जारी है। इससे पहले, लोकसभा में विश्वकप जीतने पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम, ब्लाइंड क्रिकेट टीम और कबड्डी टीम को शानदार सफलता के लिए बधाई दी गई। लोकसभा में पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल और तीन अन्य पूर्व सदस्यों के निधन की सूचना दी गई। स्पीकर ओम बिरला ने सदन की ओर से पूर्व सदस्यों के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और सदन में मौन भी रखा गया।

उधर राज्यसभा प्रधानमंत्री मोदी ने नए सभापति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत किया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सभापति का अभिवादन किया। खड़गे ने इस दौरान पूर्व सभापति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा. ‘मुझे इस बात का दुख है कि सदन को पूर्व सभापति को फेयरवेल देने का मौका नहीं मिला’।  इस पर तंज करते हुए सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा, ‘आपको बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र की हार ने काफी तकलीफ पहुंचाई है। आपको अपनी तकलीफ डॉक्टर को बताना चाहिए’। इसके बाद सांसदों ने एसआईआर के मुद्दे पर चर्चा की मांग की और मांग नहीं माने जाने पर सदन से वाकआउट किया।


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