संसद या सियासी अखाड़ा?

Categorized as संपादकीय

विचारधारा, नीति, कार्यक्रम, चुनाव घोषणापत्र आदि का आज क्या औचित्य रह गया है? अगर ये राजनीति के प्रेरक तत्व ना रहें, तो फिर पहलवानी के अखाड़े और संसद के बीच क्या फर्क रह जाएगा?

मानसून सत्र की शुरुआत के साथ संसद का नज़ारा कुछ बदला नजर आएगा। यह संभवतः पहला मौका है, जब बिना चुनाव हुए सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के संख्या बल में गुणात्मक बदलाव हुआ दिखेगा। बजट सत्र के बाद तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव) बड़ी टूट-फूट हो चुकी है, जबकि एनसीपी (शरद पवार गुट) के रुख में बदलाव के संकेत मिले हैं। इससे बिना नया जनादेश आए ही सत्ताधारी एनडीए मजबूत हो गया है। इस हद तक कि अभी दो महीने पहले लोकसभा सीटों के परिसीमन के मकसद से लाया गया जो विधेयक गिर गया था, सत्ता पक्ष उसे फिर से लाने की तैयारी में दिखा है।

इसी तरह विवादास्पद विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025 और गिरफ्तारी होने पर 30 दिन के अंदर मुख्यमंत्री/ मंत्री पद खत्म करने का प्रावधान करने वाले विधेयक को भी लाने की चर्चा थी (जिसका इरादा शायद टाल दिया है)। पिछले सत्र तक इन विधेयकों के पारित होने की संभावना बेहद कमजोर थी। अभी भी इनके लिए सरकार संख्या बल का पूरा इंतजाम नहीं कर पाई है, लेकिन कुछ और जोड़-तोड़ में कामयाब रही, तो इनके पारित होने की संभावना बन सकती है। मगर यही समस्या है। वह संभावना 2024 में आए जनादेश की भावना के विपरीत होगी। मुद्दा है कि दांव-पेच से जनादेश की भावना को इस तरह धता बताने का चलन आम हो जाता है, तो फिर विचारधारा, नीति, कार्यक्रम, चुनाव घोषणापत्र आदि का क्या औचित्य रह जाएगा?

ये राजनीति के प्रेरक तत्व ना रहें, तो फिर पहलवानी के अखाड़े में होने वाली जोर-आजमाईश और संसदीय प्रक्रियाओं के बीच क्या फर्क रहेगा? क्या उसके बाद भी संसद को बहस के जरिए अधिकतम संभव सहमति निर्माण का मंच माना जा सकेगा? दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत में इन प्रश्नों के उत्तर लगातार नकारात्मक होते गए हैँ। संसद शोर, हंगामे, वॉकआउट, बहिष्कार, और कई बार तो शारीरिक बल के जरिए झड़पों का स्थल बनती चली गई है। नतीजतन, अधिवेशनों से पहले गंभीर बहस से ज्यादा अपेक्षा टकराव और तू तू-मैं- मैं की रहने लगी है। मानसून सत्र के पहले भी राजनीतिक क्षितिज पर यही माहौल हावी नजर आया है।


Previous News Next News

More News

सुप्रीम कोर्ट का बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों को रिहा करने के निर्देश

July 28, 2026

उच्चतम न्यायालय ने पिछले सप्ताह हुए विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेने पर गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए उन सभी छात्रों को मंगलवार को रिहा करने का आदेश दिया जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इसके साथ ही न्यायालय ने केंद्र सरकार और असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा केरल सरकारों…

युवाओं को रोजगारदाता बनाने की दिशा में योगी सरकार की बड़ी पहल

July 28, 2026

उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं बल्कि रोजगार सृजित करने वाला उद्यमी बनाने के उद्देश्य से ‘यूथ अड्डा’ पहल को प्रदेश भर में विस्तार देने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह पहल नई पीढ़ी की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है और इसके…

महबूबा ने जंतर-मंतर पर दिये बयान के लिए मांगी माफी

July 28, 2026

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष एवं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने जंतर-मंतर पर दिये अपने विवादित बयान के लिए मंगलवार को माफी मांगी। गौरतलब है कि सुश्री मुफ्ती ने अभी हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर के विरोध-प्रदर्शन में शामिल होकर कश्मीर में मौजूदा उग्रवाद का जिक्र करते हुए वहां बल…

उत्तरकाशी में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित

July 28, 2026

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में सोमवार देर रात से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। भारी बारिश के कारण यमुनोत्री और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने से अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे चारधाम यात्रा पर निकले हजारों तीर्थयात्रियों तथा स्थानीय लोगों का…

अमेरिका-ईरान के बीच ‘सौहार्दपूर्ण वार्ता’ जारी : ट्रंप

July 28, 2026

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल “सौहार्दपूर्ण वार्ता” चल रही है, हालांकि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। श्री ट्रंप ने मिशिगन के मिलफोर्ड में सोमवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “हम उन पर जबरदस्त…

logo