राजनीति से प्रेरित मांग

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अभी भारत के श्रीलंका में हस्तक्षेप करने की जरूरत सिर्फ स्टालिन को महसूस हो सकती है, जिनकी चुनावी रणनीति में तमिल भावनाओं का उभारना महत्त्वपूर्ण पहलू हो सकता है। मगर ऐसा करना भारत के राष्ट्रीय हित में नहीं होगा।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से श्रीलंका में नया संविधान तैयार करने की प्रक्रिया में दखल देने की अतार्किक मांग की है। कहा जा सकता है कि इस संबंध में प्रधानमंत्री को लिखा गया उनका पत्र राजनीतिक मकसद से प्रेरित है। पहली बात तो यह कि श्रीलंका के नए संविधान का प्रारूप अभी जारी नहीं हुआ है। बल्कि 2026 के बजट में इसके लिए कोई प्रावधान नहीं है- यानी इस वर्ष संविधान निर्माण प्रक्रिया के आगे बढ़ने की संभावना नहीं है। अब तक जितनी जानकारियां उपलब्ध हैं, उनके मुताबिक श्रीलंका सरकार का इरादा उसी तरह का संविधान बनाना है, जिसका वादा उसने 2024 के चुनाव में किया था।

सत्ताधारी नेशनल पीपुल्स पॉवर पार्टी का वादा संसदीय शासन प्रणाली की वापसी, दो सदनों वाली संसद की स्थापना, सभी नागरिकों के बीच समानता एवं सत्ता के सार्थक बंटवारे को सुनिश्चित करने, सत्ता के विकेंद्रीकरण आदि के प्रावधान नए संविधान में शामिल करने का है। फिर गौरतलब है कि 2024 में दशकों बाद श्रीलंका में ऐसा चुनाव हुआ, जिसमें तमिल और सिंहली बहुल इलाकों से एक जैसा जनादेश आया। उससे वहां सिंहली- तमिल विभाजन पटने की संभावना बनी है। इसलिए अभी भारत के वहां हस्तक्षेप करने की जरूरत सिर्फ स्टालिन को महसूस हो सकती है, जिनकी अगले विधानसभा चुनाव की रणनीति में तमिल भावनाओं का उभारना महत्त्वपूर्ण पहलू हो सकता है।

मगर ऐसा करना भारत के राष्ट्रीय हित में नहीं होगा। यह याद रखना चाहिए कि नेपाल में संविधान निर्माण के समय मधेसी अधिकारों के लिए भारत की तरफ से बनाए गए दबाव पर वहां विपरीत प्रतिक्रिया हुई थी। उस कारण दोनों देशों के संबंध में दीर्घकालिक दरार पड़ गई। फिलहाल श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप करना- और वह भी जब अभी यह जाहिर नहीं है कि तमिलों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है- खुद को नुकसान पहुंचाने वाला कदम होगा। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा दिसानायके ने भारत और चीन से अपने संबंधों के बीच संतुलन बनाते हुए भारत की चिंताओं पर उचित ध्यान दिया है। इस घटनाक्रम के बीच कड़वाहट पैदा करने की कोई आवश्यकता नहीं है।


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