संघीय टकराव के मोर्चे

परंपरा यही है कि अभिभाषण निर्वाचित सरकार तैयार करती है। राष्ट्रपति/ राज्यपाल सरकार के प्रतीकात्मक प्रमुख के तौर पर उसे पढ़ते भर हैं। लेकिन वर्तमान में लोकतंत्र और संघीय व्यवस्था के तहत ऐसे स्थापित कायदे तार-तार किए जा रहे हैं। तमिलनाडु और केरल में मंगलवार को परोक्ष रूप से केंद्र और प्रत्यक्ष रूप से राज्य… Continue reading संघीय टकराव के मोर्चे

अब नया पैमाना

अगले वित्त वर्ष से सरकार जीडीपी की तुलना में ऋण के अनुपात को राजकोषीय सेहत मापने का आधार पर बनाने जा रही है। परिणाम यह होगा कि सरकार की आमदनी एवं खर्च के बीच अनुशासन की बात महत्त्वपूर्ण नहीं रह जाएगी। अगले वित्त वर्ष से सरकार की वित्तीय सेहत को मापने का पैमाना बदल जाएगा।… Continue reading अब नया पैमाना

जोखिम भरा आमंत्रण

आपत्तियां अनेक हैं। कार्यक्षेत्र को गजा में स्थिरता लाने तक सीमित रखने के बजाय बोर्ड को व्यापक अधिकार संपन्न बना दिया गया। इस तरह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जो दायरा तय किया, बोर्ड उससे बहुत आगे जाता दिखता है। गजा शांति बोर्ड में शामिल होने के लिए मिले आमंत्रण पर निर्णय लेना भारत के… Continue reading जोखिम भरा आमंत्रण

यूरोप की बेचारगी

ग्रीनलैंड मामले में हकीकत यह है कि सब कुछ डॉनल्ड ट्रंप पर निर्भर है। अगर उनके अमेरिका फर्स्ट की सोच में अपने सहयोगी देशों को निगलना भी शामिल है, तो फिर उन्हें कैसे रोका जाएगा, यह साफ नहीं है।  ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने के डॉनल्ड ट्रंप के जुनून से यूरोप में गुस्सा तो फैला… Continue reading यूरोप की बेचारगी

साहित्य में बंटवारा

राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य, कला, सिनेमा आदि पर एक खास रंग चढ़ता नजर आया है। उसको लेकर दूसरी सोच की राजनीति से जुड़ी ताकतों में असहजता रही है। उससे चौड़ी होती गई खाई अब खुले विभाजन की वजह बन रही है। साहित्य अकादमी पुरस्कारों पर उठा विवाद भारतीय साहित्य में विभाजन की हद तक पहुंच… Continue reading साहित्य में बंटवारा

चाबहार में हार?

इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी कि ईरान स्थित जिस चाबहार बंदरगाह परियोजना को चीन को नियंत्रित करने की भारत की पहल माना जाता था, उसका संचालन अब चीन के हाथ में ही जा सकता है! चाबहार बंदरगाह सिर्फ कारोबारी लिहाज से अहम नहीं है, बल्कि इसके साथ भारत की भू-राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाएं भी जुड़ी हुई… Continue reading चाबहार में हार?

खुल गया फ्लड गेट?

मुद्दा है कि प्राइवेट सेक्टर की एक कंपनी को सरकार ने बड़ी राहत दी, तो किस तर्क पर वह दूसरी कंपनियों को ऐसी राहत देने से इनकार कर सकती है? स्पष्टतः यह मुसीबत खुद केंद्र ने मोल ली है। केंद्र ने वोडोफोन आइडिया कंपनी को दो बार बेलआउट दिया। पहली बार उसमें 49 प्रतिशत हिस्सा… Continue reading खुल गया फ्लड गेट?

फिर वही रोना है

पश्चिमी अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि चीन ने “गैर-बाजार” नीतियों पर चलते हुए फ्री मार्केट अर्थव्यवस्थाओं को अपने सस्ते उत्पादों से पाट दिया है। इस कारण वहां के उद्योग-धंधों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां बनी हैं। मगर हल क्या है? साल 2025 में चीन से व्यापार में भारत का घाटा रिकॉर्ड 116.12 बिलियन डॉलर तक पहुंच… Continue reading फिर वही रोना है

सच को स्वीकार कीजिए

2026 में भारत वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी करने वाला है। भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी का भी दावेदार है। इस बीच विदेशी खिलाड़ियों की शिकायतों से भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण प्रबंधन क्षमता को लेकर खराब छवि बन सकती है। भारत की मेजबानी व्यवस्था पर डेनमार्क के खिलाड़ियों के गंभीर सवाल उठाने से इंडिया ओपन… Continue reading सच को स्वीकार कीजिए

स्वागत-योग्य हस्तक्षेप

जब गिग वर्क का चलन तेजी से बढ़ रहा हो, इस काम में लगे श्रमिकों के लिए कामकाज की अपेक्षाकृत अधिक मानवीय परिस्थितियां सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है। गिग वर्कर यूनियनों की बाकी मांगों पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। ऐप के जरिए वस्तुओं की दस मिनट के अंदर डिलीवरी के चलन को… Continue reading स्वागत-योग्य हस्तक्षेप

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