ये हाल कैसे हुआ!

ट्रंप प्रशासन से संपर्क करने के लिए भारत को ऐसी लॉबिंग फर्म पर क्यों निर्भर होना पड़ा है, जिसके संस्थापकों को डॉनल्ड ट्रंप का करीबी माना जाता है? व्यापार हो या भू राजनीति- क्या ट्रंप प्रशासन से भारत का सीधा संवाद नहीं है। क्या भारत के विदेश मंत्री और अन्य अधिकारियों को अमेरिकी अधिकारियों से… Continue reading ये हाल कैसे हुआ!

जमानत का नया पैमाना

खालिद और इमाम पांच साल से जेल में हैं, जबकि निचली अदालत में मुकदमे की जिरह तक अभी शुरू नहीं हुई है। क्या यह सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी नहीं है कि वह ऐसी देर के लिए भी जवाबदेही तय करे? फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के सिलसिले में गिरफ्तार नौजवानों की जमानत अर्जी पर फैसला… Continue reading जमानत का नया पैमाना

धमकी भर से हड़कंप

ट्रंप भारत को लगातार धमकियां दे रहे हैं, इसके बावजूद कि भारत ने अमेरिका से दोगुना तेल खरीदा है। मुद्दा है कि भारत अमेरिका के सामने इतना लाचार क्यों नजर आता है? जाहिरा तौर पर इसकी वजह भारत की अपनी कमजोरियां हैँ। डॉनल्ड ट्रंप ने संकेतों की भाषा में धमकी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी… Continue reading धमकी भर से हड़कंप

वोट खरीद की योजनाएं

बुजुर्गों को पेंशन मिले, यह कल्याणकारी सोच है। मगर ऐसी सामाजिक सुरक्षा सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को क्यों मिलनी चाहिए? सरकारी कर्मचारियों को एक अलग सुविधा-प्राप्त वर्ग के रूप में रखने के प्रयासों के दुष्परिणाम पहले भी सामने आ चुके हैं। बिहार की तर्ज पर असम सरकार ने भी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले महिलाओं के… Continue reading वोट खरीद की योजनाएं

खेल में बिगड़ती बात

बीसीसीआई ने गड़बड़झाला किया। क्या अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों को लेकर भारत को बांग्लादेश से क्रिकेट संबंध तोड़ लेना चाहिए? बीसीसीआई ऐसा सोचती है, तो फिर उसने बांग्लादेश के खिलाड़ियों को आईपीएल नीलामी में क्यों शामिल किया? टी-20 वर्ल्ड कप में खेलने के लिए भारत ना आने का बांग्लादेश का एलान क्रिकेट और भारत दोनों… Continue reading खेल में बिगड़ती बात

अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर प्रहार

ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के खिलाफ जो तर्क दिया है, आशंका है कि वह वैसी ही दलील ग्रीनलैंड, क्यूबा, मेक्सिको और यहां तक कि कनाडा के खिलाफ भी गढ़ सकता है। इसीलिए इस हमले से अधिकांश देशों के कान खड़े हुए हैं। डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के आसपास सैन्य दबाव कई महीनों से बना… Continue reading अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर प्रहार

प्रतिभा नहीं काफी पर्याप्त

यह प्रश्न हमेशा मौजूद रहा है कि भारत पदक तालिका में अपनी मौजूदा दयनीय स्थिति से कैसे उबरे। बिंद्रा समिति इसका मूलमंत्र बताया है कि खेल प्रशासन को पेशेवर बनाना, जिसमें जवाबदेही तय करने की करने की ठोस व्यवस्था हो। सिर्फ प्रतिभा की बदौलत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल में सफलता कभी- कभार ही मिल सकती… Continue reading प्रतिभा नहीं काफी पर्याप्त

माली मुश्किलों का आईना

प्रधानमंत्री के साथ अर्थशास्त्रियों की बजट पूर्व बैठक में अर्थव्यवस्था की मुश्किलें खुल कर सामने आईं। अर्थशास्त्रियों ने ब्याज चुकाने की बढ़ी देनदारी, कमजोर होती घरेलू बचत, और सरकार के बढ़े पूंजीगत निवेश से आई दिक्कतों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री के साथ बजट पूर्व बैठक में उपस्थित अर्थशास्त्रियों ने अर्थव्यवस्था में पैदा हुई मुश्किलों का… Continue reading माली मुश्किलों का आईना

नया साल, पुरानी चुनौतियां

नव वर्ष में प्रवेश के अवसर पर सचमुच संकल्प लिया जाए, तो अमन-चैन का लक्ष्य असंभव नहीं है। यह तो अवश्य सुनिश्चित किया जा सकता है कि जब 2026 विदा लेगा, तब हम आज से बेहतर एवं अधिक स्थिर हाल में हों! नव वर्ष के आरंभ पर यह कामना स्वाभाविक है कि 2026 भारत के… Continue reading नया साल, पुरानी चुनौतियां

शासक इतने क्यों भयभीत?

हालात यहां तक आ पहुंचे हैं कि भविष्य में संभावित आंदोलनों से निपटने की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है। बीपीआरएंडडी ने स्वतंत्र भारत में अब तक हुए तमाम आंदोलनों से संबंधित सूचना राज्य सरकारों से मांगी है। नरेंद्र मोदी सरकार किसी प्रतिरोध या जन आंदोलन को जायज नहीं मानती, यह तो जग-जाहिर… Continue reading शासक इतने क्यों भयभीत?

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