बढ़ता कर्ज, घटती संपत्ति

साल 2019 के बाद से भारतीय परिवारों की औसत संपत्ति 48 प्रतिशत बढ़ी है, लेकिन इसी दौरान उपर कर्ज का बोझ 102 फीसदी बढ़ गया है। इसके पहले भारतीय परिवारों की बचत में भारी गिरावट के तथ्य सामने आ चुके हैं। परिवारों में बचत की घटी क्षमता के कारण उन पर कर्ज बढ़ने और उनकी… Continue reading बढ़ता कर्ज, घटती संपत्ति

मालूम बातों का दोहराव

भारत में सेवा क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका है, लेकिन इसके भीतर अधिकांश कर्मियों को रोजगार सुरक्षा या सामाजिक संरक्षण हासिल नहीं है। अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा योगदान के बावजूद सेवा क्षेत्र के कर्मी निम्न वेतन जाल में फंसे हुए हैं। नीति आयोग ने समस्या पर रोशनी डाली है, लेकिन ठोस समाधान सुझाने में विफल रहा… Continue reading मालूम बातों का दोहराव

नाकामी में छिपे सबक

विशेषज्ञों को जरूर मालूम होगा कि कृत्रिम बारिश के लिए आसमान में बादलों की कैसी मौजूदगी जरूरी होती है। इस ज्ञान का इस्तेमाल ना करने के कारण उन्होंने दिल्लीवासियों की अपेक्षाएं बढ़ाईं और उन्हें पूरा करने में नाकाम रहे। राष्ट्रीय राजधानी में क्लाउड सीडिंग के जरिए कृत्रिम बारिश कराने की कोशिश की नाकामी में कई… Continue reading नाकामी में छिपे सबक

वायदों का बेतुकापन

घोषणापत्र में कुछ वादे तो ऐसे हैं, जिनसे 2014 का नरेंद्र मोदी का वह सांकेतिक वादा याद आ जाता है, जिसमें उन्होंने विदेशों से काला धन वापस लाकर हर भारतीय के खाते में 15 लाख रुपये डालने की बात कही थी! कहावत है कि कुछ सपने इतने अच्छे होते हैं कि वे सच नहीं हो… Continue reading वायदों का बेतुकापन

अग्निवीरों का अग्निपथ

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेज कर कहा है कि वे प्राइवेट सुरक्षा एजेंसियों को रिटायर्ड अग्निवीरों की भर्ती के लिए राजी करें। खासकर उन एजेंसियों को, जिनकी सेवाएं सरकारी विभाग, बैंक आदि लेते हैं। नरेंद्र मोदी सरकार ने जब ‘अग्निपथ’ योजना लागू की, तभी ये चेतावनी दी… Continue reading अग्निवीरों का अग्निपथ

नहीं बदला है नज़रिया

एसआईआर की जरूरत एवं उसके औचित्य पर कोई सवाल नहीं है। मुद्दा वो माहौल है, जिसमें इसे आगे कराया जा रहा है। निर्वाचन आयोग के हठ के कारण सवाल और संदेहों से भरा ये माहौल आगे भी जारी रहने वाला है। निर्वाचन आयोग ने 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष… Continue reading नहीं बदला है नज़रिया

होगा व्यापार युद्ध-विराम?

ट्रंप- शी वार्ता में मलेशिया में बनी सहमतियों पर दस्तखत हो जाते हैं। ऐसा हुआ, तो अमेरिका और चीन के अलावा बाकी दुनिया को भी राहत मिलेगी। मगर जो हालात हैं, उनके बीच यह करार भी एक अल्पकालिक युद्धविराम ही होगा। दुनिया नजरें गुरुवार को दक्षिण कोरिया के ग्योंगजू शहर पर होंगी, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति… Continue reading होगा व्यापार युद्ध-विराम?

ये दिलासा नाकाफी है

रुबियो ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से तनाव है, इसलिए अमेरिका के पाकिस्तान से गहराते रिश्ते पर भारतीय चिंता को वे समझते हैं। मगर उन्होंने सलाह दी कि भारत ‘परिपक्व’ और ‘व्यावहारिक नजरिया’ अपनाए। जिस रोज डॉनल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल असीम मुनीर… Continue reading ये दिलासा नाकाफी है

मध्यम मार्ग ही उचित

एआई से तैयार कंटेन्ट आज एक ऐसी हकीकत हैं, जिनके साथ जीना समाज को सीखना होगा। ऐसे कंटेन्ट समाज उथल-पुथल का जरिया बन सकते हैं। अतः इस कारोबार से जुड़े सभी पक्षों को न्यूनतम अनुशासन स्वीकार करना चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) से तैयार कंटेन्ट को विनियमित करने के लिए पिछले हफ्ते सरकार ने नियमों का… Continue reading मध्यम मार्ग ही उचित

लोकपाल नया जंजाल?

लोकपाल का रिकॉर्ड ऐसा है, जिससे उस पर हो रहे सरकारी खर्च के औचित्य पर सवाल खड़ा हो जाता है। यह लोगों के कमजोर भरोसे का ही संकेत है कि इस संस्था के पास आने वाली शिकायतों में भारी गिरावट आ चुकी है। वैसे तो मांग बहुत पुरानी थी, लेकिन 2011 में अन्ना आंदोलन के… Continue reading लोकपाल नया जंजाल?

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