तालिबान पर यू-टर्न?

यह महत्त्वपूर्ण है कि अफगानिस्तान संबंधी मास्को फॉर्मेट कंसल्टेशन की बैठक में भारत शामिल हुआ और वहां उभरी एक ऐसी राय से सहमत हुआ, जो स्पष्टतः अमेरिका के खिलाफ है। बैठक में रूस, चीन और पाकिस्तान के प्रतिनिधि भी थे। खबर है कि भारत यात्रा के दौरान अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर… Continue reading तालिबान पर यू-टर्न?

आखिर तक पर्दादारी!

सवाल नहीं उठते, अगर निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश की भावना के अनुरूप जारी मतदाता सूची में नाम जोड़ने या काटने की वजह भी बता दी होती। मगर आयोग ने यह नहीं किया, तो बात फिर अदालत पहुंची। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के क्रम में निर्वाचन आयोग… Continue reading आखिर तक पर्दादारी!

विधि सत्ता पर हमला

वकील राकेश किशोर के प्रकरण से जो भय निर्मित होगा, उसका न्यायिक कार्रवाइयों पर संभावित असर का अंदाजा लगाया जा सकता है। मुद्दा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपनी और कानून की मर्यादा की रक्षा में अगंभीर रुख क्यों अपनाया है?  न्यायालय की अवमानना की सबसे उदार व्याख्या यह है कि कोई व्यक्ति किसी न्यायिक… Continue reading विधि सत्ता पर हमला

कठघरे में निगरानी व्यवस्था

कफ सिरप से मौतों की खबरें भी हाल के वर्षों में सुर्खियों में रही हैं। इसी तरह अस्पतालों में अग्निकांड का सिलसिला भी लंबा होता गया है। ऐसी घटनाओं में एक समान पहलू नियामक संस्थाओं की गैर-जिम्मेदारी रहा है। जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में हुए हृदयविदारक अग्निकांड ने देश में निरीक्षण और निगरानी… Continue reading कठघरे में निगरानी व्यवस्था

भारत की ‘लक्ष्मण रेखाएं’

विदेश मंत्री से सिर्फ यह अपेक्षा नहीं होती कि वे दुनिया में उभरी नई प्रवृत्तियों और नई तकनीकों से आ रही चुनौतियों की व्याख्या भर करें। उनसे उम्मीद इन बदले हालात में देश की नई भूमिका पर प्रकाश डालने की होती है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कह दिया है कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते… Continue reading भारत की ‘लक्ष्मण रेखाएं’

एक के खिलाफ दूसरा

समस्या की जड़ वह आर्थिक दिशा है, जिसमें धन का कुछ परिवारों में संकेंद्रण होता गया है। उस पर ध्यान ना देकर वंचित तबके जातीय आधार पर एक दूसरे के खिलाफ लामबंदी कर रहे हैं। समाज के लिए यह चिंताजनक घटनाक्रम है। महाराष्ट्र सरकार के सामने एक (मराठा) को मनाएं, तो दूजा (ओबीसी) रूठ जाता… Continue reading एक के खिलाफ दूसरा

बिहार से शुरुआत हो

कई चरणों में मतदान आम चलन बना हुआ है। मगर साथ ही यह धारणा भी मजबूत हुई है कि इस तरह चुनाव को अत्यधिक खर्चीला बनाया गया है, जिससे कम संसाधन वाले दलों के लिए प्रतिकूल स्थितियां बनी हैं। बिहार के राजनीतिक दलों में बनी यह सहमति महत्त्वपूर्ण है कि विधानसभा चुनाव के लिए मतदान… Continue reading बिहार से शुरुआत हो

स्टेबलकॉइन की चुनौती

वित्त मंत्री के बयान को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए कि बदले हालात में तमाम देश अब स्टेबलकॉइन्स को नजरअंदाज नहीं कर सकते। इसलिए कि स्टेबलकॉइन जैसे आविष्कार मुद्रा एवं पूंजी के प्रवाह का रूप बदल रहे हैं। डॉनल्ड ट्रंप के दौर में क्रिप्टो करेंसी- खासकर स्टेबलकॉइन्स को मिली स्वीकृति तमाम देश के लिए… Continue reading स्टेबलकॉइन की चुनौती

बात है मुद्दे की

बिहार में जारी अंतिम मतदाता सूची में ज्यादा खामियां नहीं हैं, तो अब ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विराम लग जाएगा। वैसे भी यह मुद्दा विपक्षी कार्यकर्ताओं को जितना गोलबंद कर पाया, आम मतदाताओं पर इसका उतना असर नहीं दिखा था। बिहार में विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) पूरा होने के बाद अंतिम मतदाता सूची को जारी… Continue reading बात है मुद्दे की

इनसे छीनो, उनको दो!

हाल के वर्षों में बिजली की किल्लत घटी है और अच्छी सड़कें बनी हैं। मगर बिजली सस्ती नहीं हुई है और टोल-टैक्स से सड़क परिवहन महंगा बना हुआ है। ये सभी लागतें आखिरकार उत्पाद की कीमत में ही शामिल होती हैं। महाराष्ट्र सरकार ने व्यापारिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली पर अतिरिक्त कर को… Continue reading इनसे छीनो, उनको दो!

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