अब तो बहस छिड़े

लोकतंत्र में विचार जताने की आजादी पर कोई तलवार नहीं लटकनी चाहिए। अधिक से अधिक यह हो सकता है कि मानहानि दीवानी श्रेणी का अपराध रहे, हालांकि इसके तहत भी प्रतीकात्मक दंड का प्रावधान ही होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के यह टिप्पणी स्वागतयोग्य है कि मानहानि को अपराध की श्रेणी से हटाने का समय आ… Continue reading अब तो बहस छिड़े

भविष्य को गिरवी रखना

स्वस्थ नियम है कि सरकारों को कर्ज सामान्यतः निवेश के लिए ही लेना चाहिए। मगर ताजा रुझान यह है कि सरकारें कर्ज के जरिए रूटीन खर्च जुटा रही हैं। साथ ही एक बड़ी रकम वोट खरीदने पर खर्च किया जा रहा है। राज्यों के ऊपर कर्ज के बढ़ते बोझ पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी)… Continue reading भविष्य को गिरवी रखना

इजराइल की दरकती जमीन

संयुक्त राष्ट्र की जांच समिति ने पिछले हफ्ते कहा कि गज़ा में जारी इजराइली कार्रवाई ‘मानव संहार’ की श्रेणी में आती है। इसके पहले हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय अपने अंतरिम निर्णय में इजराइली कार्रवाइयों को ‘मानव संहार जैसा’ बता चुका है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और पुर्तगाल ने स्वतंत्र फिलस्तीनी राज्य को मान्यता प्रदान कर दी… Continue reading इजराइल की दरकती जमीन

संकट में नया जुमला?

शायद ही कोई इससे असहमत होगा कि भारत को ‘चिप से शिप’ तक में आत्म-निर्भर होना चाहिए। ऐसा नहीं है, तो बेशक उसका दोष पूर्व सरकारों पर भी जाता है। मगर देश की कमान 11 साल से नरेंद्र मोदी के हाथ में है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि कोई बड़ा देश भारत का दुश्मन नहीं… Continue reading संकट में नया जुमला?

ट्रंप का प्ले-बुक

ट्रंप मोदी की खूब तारीफ करते हैं। उन्हें ‘महान नेता’, ‘बहुत करीबी दोस्त’, ‘शानदार काम कर रहे नेता’ बताते हैं। लेकिन लगे हाथ वे ऐसे फैसले भी कर रहे हैं, जिनसे भारत के दीर्घकालिक हितों को क्षति पहुंच रही है। डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के नीतिकार संभवतः इस निष्कर्ष पर हैं कि भारतीय विदेश नीति का… Continue reading ट्रंप का प्ले-बुक

इस ओर रखें नज़र

समझौते का यह प्रावधान खास चिंता का विषय है कि सऊदी अरब या पाकिस्तान में किसी एक पर हमला हुआ, तो दूसरा देश उसे खुद पर हमला मानेगा। इस प्रावधान के तहत दोनों देश एक दूसरे के यहां अपने हथियार तैनात कर सकेंगे। सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए ‘रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते’ पर… Continue reading इस ओर रखें नज़र

गणितज्ञों की बात सुनें

यूजीसी को सौंपे गए 900 से अधिक गणितज्ञों के पत्र का सार हैः ‘गणित में शानदार प्रदर्शन की विरासत रखने वाले इस देश में पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए, जो समकालीन दुनिया के तकाजों को पूरा करने के लिए छात्रों को तैयार करे।’ नौ सौ से ज्यादा प्रतिष्ठित गणितज्ञों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से अंडर ग्रैजुएट… Continue reading गणितज्ञों की बात सुनें

‘सकारात्मक और अग्र-द्रष्टा’?

व्यापार वार्ता के ताजा दौर के बाद जारी बयान से यह जाहिर नहीं होता कि अमेरिका ने जो शर्तें लगाई हैं और भारत ने अपनी जो लक्ष्मण रेखा बता रखी है, क्या उन पर दोनों देश अपना रुख नरम करने को तैयार हैं? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की कथित ‘दोस्ती’ में… Continue reading ‘सकारात्मक और अग्र-द्रष्टा’?

दो पाटन के बीच

यह निर्विवाद है कि अस्पतालों और बीमा कंपनियों के बीच की खींचतान ने उन मध्यवर्गीय लोगों की इलाज संबंधी आश्वस्ति छीन ली है, जिनके लिए निरंतर निजीकरण का शिकार हुए हेल्थ सेक्टर में बीमा पॉलिसी की एकमात्र सहारा है। कई बड़े अस्पतालों और कुछ बीमा कंपनियों के बीच छिड़े हालिया विवाद ने मेडिकल बीमा के… Continue reading दो पाटन के बीच

निर्यात की कमजोर जड़ें

अगस्त में निर्यात की सूरत अपेक्षा से बेहतर रही। इसमें 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मगर आयात में 10.1 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। इससे आशंका गहराई है कि अमेरिकी टैरिफ का पूरा असर अभी जाहिर नहीं हुआ है। यह अच्छी खबर है कि अगस्त में भारत का वस्तु निर्यात 6.7 प्रतिशत बढ़ा। इस महीने… Continue reading निर्यात की कमजोर जड़ें

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