ये हाल कैसे हुआ!

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ट्रंप प्रशासन से संपर्क करने के लिए भारत को ऐसी लॉबिंग फर्म पर क्यों निर्भर होना पड़ा है, जिसके संस्थापकों को डॉनल्ड ट्रंप का करीबी माना जाता है? व्यापार हो या भू राजनीति- क्या ट्रंप प्रशासन से भारत का सीधा संवाद नहीं है।

क्या भारत के विदेश मंत्री और अन्य अधिकारियों को अमेरिकी अधिकारियों से मिलने का समय पाने के लिए लॉबिंग फॉर्म की मदद लेनी पड़ रही है? ऐसा संकेत एसएचडब्लू एलएलसी नाम की लॉबिंग कंपनी के विवरण से मिला है। अमेरिकी कानून के मुताबिक इस कंपनी ने अपने कामकाज से जुड़ी सूचनाएं संबंधित विभाग के पास दर्ज कराई हैं। उसके आधार पर मीडिया में आई रिपोर्टों के मुताबिक 24 अप्रैल 2025 के बाद वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से अधिकारियों की मुलाकात के लिए एसएचडब्लू ने 60 बार अर्जियां दीं। बताया गया है कि ये मुलाकातें व्यापार वार्ता से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक से संबंधित थीं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस रोज युद्धविराम हुआ, उस रोज ऐसी चार अर्जियां दिए जाने की सूचना एसएचडब्लू के दस्तावेज में दर्ज है, हालांकि उनसे यह स्पष्ट नहीं होता कि अर्जियां लड़ाई रुकने के पहले दी गईं, या बाद में।

जिन लोगों से मुलाकात के लिए आवेदन किए गए, उनमें ह्वाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स, अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्य रिकी गिल, व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर और संचार निदेशक स्टीवन चिउंग शामिल हैं। कुछ ही रोज पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि रिकी गिल ने युद्धविराम कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। बहरहाल, असल मसला यह नहीं है। युद्धों के दौरान बड़ी ताकतें बीच-बचाव करती हैं- यह कोई नई बात नहीं है।

मुद्दा है कि ट्रंप प्रशासन से संपर्क करने के लिए भारत को ऐसी लॉबिंग फर्म पर क्यों निर्भर होना पड़ा है, जिसके संस्थापकों को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का करीबी माना जाता है? व्यापार हो या भू राजनीति- क्या ट्रंप प्रशासन से भारत का सीधा संवाद नहीं है? विदेश मंत्रालय से जुड़े पूर्व एवं वर्तमान अधिकारियों ने मीडिया से कहा है कि ट्रंप प्रशासन के “लेन-देन” वाले नजरिए के कारण भारत को यह तरीका अपनाना पड़ा है, हालांकि पहले की सरकारों ने भी अमेरिका में भारतीय पक्ष को मजबूत करने के लिए लॉबिंग कंपनियों की मदद ली थी। बहरहाल, कथित दोस्ती में अमेरिका भारत को क्या दर्जा देता है, ये पहलू उसे उजागर करने वाला है।


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