आतंकवाद और अमेरिका

इस्लामाबाद में हुए बम धमाके में 12 मौतें हुईं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तुरंत इसके लिए भारत को दोषी बता दिया। और उतनी ही फुर्ती से इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस पर अपना बयान जारी किया। सुरक्षा एजेंसियों ने 10 नवंबर को आतंकवाद के एक बड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने का दावा… Continue reading आतंकवाद और अमेरिका

मंडराया आतंक का साया

पाकिस्तान को सबक सिखाने के क्या माध्यम हमारे पास हैं? ऑपरेशन सिंदूर को जिस तरह बीच में रोक दिया गया, उससे सवाल ज्यादा गंभीर हो गए हैँ। बिना इनका जवाब दिए देश में आश्वस्ति का वातावरण नहीं बनाया जा सकेगा।  दिल्ली में लाल किले के पास कार विस्फोट से ठीक पहले सुरक्षा बलों ने फरीदाबाद… Continue reading मंडराया आतंक का साया

समस्या कहीं गहरी है

बिना आर्थिक भागीदारी बढ़ाए और सामाजिक परिवेश बदले सिर्फ राजनीति प्रतिनिधित्व देना प्रतीकात्मक महत्त्व भर का साबित हो सकता है। ऐसी अनेक मिसालें अभी मौजूद हैं। अतः महिला आरक्षण की बहस को अधिक बड़ा फ़लक दिए जाने की जरूरत है।  सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को ‘सबसे बड़ी अल्पसंख्यक’ बताया है। अगर इसका अर्थ निर्णय के… Continue reading समस्या कहीं गहरी है

नकाब का उतर जाना

नए संशोधन के तहत फील्ड मार्शल असीम मुनीर कमांडर ऑफ डिफेंस फोर्सेज बन कर सेना के सभी अंगों के प्रमुख बन जाएंगे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से अपनी पहल पर मामलों का संज्ञान लेने का अधिकार छीन लिया जाएगा। पाकिस्तान में संविधान संशोधन के जरिए सत्ता का नया ढांचा कायम कर दिया गया है। या… Continue reading नकाब का उतर जाना

मुसीबत बताना जुर्म है!

संभवतः सरकार की निगाह में उससे असहमत या उसकी नाकामियों पर बात करने वाली हर आवाज अवैध है, इसलिए प्रदूषण पर बेफिक्री के खिलाफ इंडिया गेट पर जुटे महिलाओं और बुजुर्गों तक को पुलिस जबरन अपनी बसों में ले गई। दिल्ली में जहरीली हुई हवा पर सरकारी बेफिक्री के खिलाफ नई दिल्ली में इंडिया गेट… Continue reading मुसीबत बताना जुर्म है!

संकट का नया बिंदु

जोहरान ममदानी की जीत से अमेरिका में राजनीतिक ध्रुवीकरण तीखा होने के साथ-साथ कई स्तरों पर विभाजन बढ़ने की आशंका है। वैसे यह कोई छोटी विडंबना नहीं है कि दुनिया के सर्व-प्रमुख वित्तीय महानगर का मेयर अब एक डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट है! जोहरान मामदानी के विजयी होने पर एक टीकाकार ने कहा है कि न्यूयॉर्क के… Continue reading संकट का नया बिंदु

विषमता है एक घुन

जिस छोटे से तबके के हाथ में धन केंद्रित होता है, सरकारी नीतियों पर उसका शिकंजा कस जाता है। यानी गैर-बराबरी ऐसा घुन है, जो लोकतंत्र को कुतर डालती है। भारत में अमीर- गरीब की खाई तेजी से बढ़ी है। भारत में आर्थिक गैर-बराबरी अत्यधिक बढ़ चुकी है, यह कोई नया तथ्य नहीं है। नई… Continue reading विषमता है एक घुन

फिर कॉरपोरेट बेलआउट

जब ऐसे कदम उठाए जाते हैं, तो उसके लिए तर्क गढ़ लिए जाते हैँ। रोजगार बचाना आम दलील है। वीआई के मामले में यह भी कहा गया कि कंपनी फेल हुई, तो बाजार में जियो और एयरटेल का द्वि-अधिकार हो जाएगा। आलोचक अक्सर कहते हैं कि मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था का वास्तविक अर्थ हैः फायदे का… Continue reading फिर कॉरपोरेट बेलआउट

अजीब ये नजरिया है

क्या उससे इस बात से परदा हटेगा कि दिवाली को- जिस रोज एक्यूआई के अति असामान्य स्तर तक जाता रहा है- अधिकांश मशीनें बंद क्यों थीं? और क्या सचमुच मशीनों के पास जल छिड़काव कर स्थिति बेहतर दिखाने की कोशिश हुई? आरोप पहले से लग रहे थे। अब ये बात सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में… Continue reading अजीब ये नजरिया है

भारत की विश्व विजय

महिला क्रिकेट में भारत का चैंपियन बनना एक युगांतकारी घटना बन सकती है। यहां से संभव है कि मुख्य मुकाबले की धुरी उसी तरह खिसक जाए, जैसा पुरुष क्रिकेट में वेस्ट इंडीज के उदय के साथ 1970 के दशक में हुआ था। भारत की महिला क्रिकेट टीम ने आखिरकार उस शिखर पर विजय पताका लहराया… Continue reading भारत की विश्व विजय

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