नकाब का उतर जाना

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नए संशोधन के तहत फील्ड मार्शल असीम मुनीर कमांडर ऑफ डिफेंस फोर्सेज बन कर सेना के सभी अंगों के प्रमुख बन जाएंगे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से अपनी पहल पर मामलों का संज्ञान लेने का अधिकार छीन लिया जाएगा।

पाकिस्तान में संविधान संशोधन के जरिए सत्ता का नया ढांचा कायम कर दिया गया है। या इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि वहां जो ढांचा व्यवहार में चल रहा था, उसे अब औपचारिक रूप दे दिया गया है। यानी देश में वास्तविक सत्ता निर्वाचित सरकार के हाथ में होने का नकाब उतार फेंका गया है। वैसे हकीकत यही है कि अप्रैल 2022 में इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार को सत्ता से हटाए जाने के बाद से असल सत्ता सेना के हाथ में रही है, जिसने शहबाज शरीफ सरकार को अपना ‘लोकतांत्रिक मुखौटा’ बना रखा है। इमरान खान की सरकार हटाई ही इसलिए गई, क्योंकि उसने संप्रभु अधिकार खुद में होने का भ्रम पाला था।

मगर तब सेना को नकाब की जरूरत पड़ी, क्योंकि खान की सरकार को गिराने के क्रम में वह देश में अभूतपूर्व रूप से अलोकप्रिय हो गई। बहरहाल, इस साल मई में ऑपरेशन सिंदूर (पाकिस्तान में बुनयान- अल-मरसूस) के दौरान पाकिस्तानी सेना देश के अंदर अपनी कथित जीत का नैरेटिव बनाने में कामयाब रही। तब से उसका आकलन है कि अब सत्ता पर औपचारिक नियंत्रण बना लेने का सही वक्त है। उस सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर ने खुद को फील्ड मार्शल बनवाया था।

अब नए संशोधन के तहत वे कमांडर ऑफ डिफेंस फोर्सेज बन कर सेना के सभी अंगों के प्रमुख बन जाएंगे। इसके साथ ही संवैधानिक मामलों के लिए अलग से न्यायालय का गठन होगा, जबकि वर्तमान सुप्रीम कोर्ट से अपनी पहल पर मामलों का संज्ञान लेने का अधिकार छीन लिया जाएगा। पाकिस्तान के सत्ता तंत्र में हमेशा, कम-से-कम रक्षा एवं विदेश नीति संबंधी मामलों में, सेना के पास निर्णायक अधिकार रहे हैं। देशी मामलों में भी उसके आर्थिक एवं अन्य हित व्यवहार में सरकार और न्यायपालिका की पहुंच से बाहर रहे हैं। फिर भी कभी-कभार अदालतें सेना नेतृत्व की मर्जी के खिलाफ जाकर कुछ मामलों का संज्ञान ले लेती थीं। इमरान खान सरकार ने नीतिगत मामले अपने हाथ में लेने की कोशिश की थी। फील्ड मार्शल मुनीर ने अब ऐसी संभावनाओं पर विराम लगवा दिया है।


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