ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन किया है। भारत और ब्राजील लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दावेदारी कर रहे हैं।
चीन और रूस ने सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के रूप में भारत और ब्राजील की इस आकांक्षा के लिए अपना समर्थन दोहराया है।
शनिवार को यहां भारत की मेजबानी और अध्यक्षता में आयोजित दो दिन के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाये गए दिल्ली घोषणा पत्र में कहा गया है कि ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार का समर्थन करते हुए सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण, प्रभावी और सक्षम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने की बात कही।
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वर्ष 2022 की बीजिंग और 2023 की जोहान्सबर्ग-II नेताओं की घोषणाओं का उल्लेख करते हुए चीन और रूस ने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के रूप में, भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षाओं के लिए अपना समर्थन दोहराया।
सदस्य देशों ने 2023 के जोहान्सबर्ग-II नेताओं की घोषणा का उल्लेख करते हुए संयुक्त राष्ट्र में सुधार के प्रति अपना समर्थन दोहराया। इसमें सुरक्षा परिषद भी शामिल है। ब्रिक्स ने कहा कि परिषद में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि वह मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना कर सके और अफ्रीका, एशिया तथा लैटिन अमेरिका के उभरते और विकासशील देशों की अंतरराष्ट्रीय मामलों में, खासकर संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में, बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षाओं को समर्थन मिल सके।
ब्रिक्स देशों ने अफ्रीकी देशों की वैध आकांक्षाओं को भी स्वीकार किया, जो एजुलविनी सहमति और सिर्ते घोषणा में व्यक्त की गई हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार से वैश्विक दक्षिण की आवाज मजबूत होनी चाहिए।
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