बिहार में नई सरकार का गठन हो गया है। मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्रियों की शपथ के 22 दिन बाद बाकी मंत्रियों की शपथ हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित पार्टी के सभी बड़े नेताओं की मौजूदगी में शपथ समारोह हुआ। भाजपा और जदयू के साथ साथ बाकी सहयोगी पार्टियों के प्रति भी पूरा सद्भाव दिखाया गया। तीनों छोटी पार्टियों को भी उनकी संख्या के हिसाब से मंत्री पद दिए गए। जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटों को मंत्री बनवाया। चिराग पासवान के भी दो मंत्री बने। लेकिन असली कहानी भाजपा और जदयू की है। दोनों ने अपने अपने कोर वोट आधार को ध्यान में रख कर ही मंत्री बनाए। इससे लगा कि दोनों अपने वोट को साधे रखना चाहते हैं। एक ने दूसरे के भरोसे वोट समीकरण को साधने की बजाय खुद ही अपना वोट साधने का प्रयास किया।
जनता दल यू क वोट आधार नीतीश कुमार के शुरुआती दिनों से कोईरी, कुर्मी, धानुक और अति पिछड़ा में गंगोता के साथ साथ दलित वोट का रहा है। सो, नीतीश की पार्टी से जिन 13 मंत्रियों ने सात मई को शपथ ली उनमें दो कुर्मी, दो धानुक और एक कोईरी है। साथ ही एक गंगोता और तीन दलित हैं। पहले भाजपा कोटे से सुरेंद्र मेहता मंत्री थे, जो धानुक समाज से आते हैं। उनको इस बार मंत्रिमंडल में नहीं लिया गया और धानुक कोटे के दोनों मंत्री नीतीश कुमार के कोटे से बने। नीतीश की पार्टी ने जमां खां को भी मंत्रिमंडल में शामिल कराया। और भगवान सिंह कुशवाहा को भी मंत्री बनाया। दूसरी ओर भाजपा ने अपने कोटे से 15 मंत्रियों को शपथ दिलाई, जिसमें छह सवर्ण मंत्री हैं। दो ब्राह्मण, दो भूमिहार और दो राजपूत मंत्री बनाए गए। भाजपा ने बिहार के ही कायस्थ नेता नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है। ध्यान रहे भाजपा ने विधानसभा चुनाव में अपने कोटे की 101 सीटों में से 49 सीटें अगड़ी जातियों को दी थी। बहरहाल, अगड़ी जातियों के अलावा भाजपा ने चार मंत्री वैश्य समुदाय से बनाए और उसमें भी कानू, कलवार, तेली और सूढ़ी चारों उप समूहों का ख्याल रखा।
