कई राज्यों में भूलसुधार करेगी भाजपा!

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अब सवाल है कि भारतीय जनता पार्टी ने यह सबक लिया है कि राज्यों में मजबूत नेता की जरुरत है और तीन साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में उसे वापस बहुमत हासिल करना है तो वह भूलसुधार कब करेगी? कई राज्यों में भाजपा को भूलसुधार की जरुरत महसूस हो रही है। खास कर राजस्थान और मध्य प्रदेश को लेकर भाजपा बहुत भरोसे में नहीं है। राजस्थान में पूर्ण बहुमत मिलने के बाद भाजपा ने भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बनाया था और उसके साथ ही हुए चुनाव के बाद मध्य प्रदेश में मोहन यादव को कमान दी गई थी। लेकिन दोनों राज्यों में सरकार के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं और दोनों मुख्यमंत्री राजनीतिक मैसेज बनवाने में भी सफल नहीं हुए हैं। राजस्थान में तो लोकसभा चुनाव में ही कमजोरी जाहिर हो गई थी। सोचें, 2019 में भाजपा ने राज्य की सभी 25 सीटें जीती थीं। भाजपा ने खुद 24 और एक सीट उसकी सहयोगी पार्टी ने जीती थी। कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी। लेकिन 2024 में कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं।

उसके बाद से ही इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि राज्य में बदलाव की जरुरत है। मध्य प्रदेश में भाजपा जरूर सभी सीटें जीती लेकिन उसमें मुख्यमंत्री का कोई योगदान नहीं है। दूसरे, भाजपा को यह भी समझ में आ रहा है कि मोहन यादव के नाम से उसे हिंदी पट्टी में यादव वोट का लाभ नहीं हो रहा है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी भाजपा ने प्रयोग किया है लेकिन वहां को लेकर अभी ज्यादा चर्चा नहीं है। ध्यान रहे भाजपा आलाकमान को अगर लग जाए कि कोई फैसला गलत हो गया है तो उसे उसमें सुधार करने में समय नहीं लगता है। मिसाल के तौर पर उत्तराखंड को देख सकते हैं, जहां भाजपा ने त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया लेकिन जब लाभ नहीं दिखा तो चार महीने में ही उनको बदल कर पुष्कर सिंह धामी को सीएम बनाया गया। उसके बाद धामी 2022 का चुनाव हार गए फिर भी उनको मुख्यमंत्री बनाया गया क्योंकि उनकी कमान में पार्टी ने चुनाव जीत लिया था। सो, कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए भाजपा आलाकमान कुछ राज्यों में भूलसुधार पर विचार कर रहा है।


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