सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ऐसा नहीं है कि सिर्फ राजनीतिक स्तर पर भाजपा की लड़ाई चल रही है। भाजपा के नेता किसी न किसी कानूनी मुकदमे में भी दोनों को उलझाए रखना चाहते हैं। नेशनल हेराल्ड मामले में तो दोनों के खिलाफ धनशोधन का मामला चल ही रहा है, राहुल गांधी के खिलाफ देश भर की अदालतों में मानहानि के दर्जन भर मामले दर्ज हैं। लेकिन इसके अलावा भी निजी मामलों में दोनों के खिलाफ चलने वाला अभियान भी थम नहीं रहा है। ताजा मामला राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता है। भाजपा के कर्नाटक के एक नेता एस विग्नेश शिशिर ने याचिका दायर की है। पहले एमपी, एमएलए कोर्ट ने इस याचिका के आधार पर एफआईआर दायर करने की मांग खारिज कर दी थी। लेकिन बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया और साथ ही यह भी कहा कि इसकी जांच सीबीआई को दी जाए। हालांकि हाई कोर्ट ने ही अब इस आदेश पर रोक लगा दी है।
हालांकि इस रोक से मामला समाप्त नहीं होता है। इस पर नोटिस जारी किया गया है और आगे इसकी सुनवाई होगी। इसी तरह भाजपा के एक नेता विकास त्रिपाठी ने कोर्ट में याचिका दायर की है कि सोनिया गांधी ने भारत की नागरिकता लेने से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज करा लिया था। कहा गया है कि उन्होंने 1983 में भारत की नागरिकता ली थी, जबकि 1980 की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज हो गया था। यह मुकदमा भी चल रहा है। भाजपा के बड़े नेताओं ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कई बार यह मुद्दा उठाया है। सो, सोनिया व राहुल के खिलाफ निजी, राजनीतिक और आर्थिक हर तरह के मामले चल रहे हैं।
