राहुल गांधी बड़ी मुश्किल से तमिलनाडु में प्रचार के लिए गए। शनिवार को उन्होंने कई जगह जनसभाओं को संबोधित किया और डीएमके, कांग्रेस व वीसीके सहित दूसरी सहयोगी पार्टियों के उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे। लेकिन सबसे हैरानी की बात यह रही कि राहुल गांधी और एमके स्टालिन ने कहीं पर मंच साझा नहीं किया। पहले इसको लेकर कयास लगाए जा रहे थे। मंच साझा करेंगे या नहीं करेंगे पर दुविधा थी। कांग्रेस के कई नेताओं ने कहा कि परिसीमन और महिला आरक्षण के बिल को लेकर संसद में जिस तरह की एकजुटता दिखी है वही तमिलनाडु में दिखनी चाहिए।
दोनों पार्टियों के नेता मान रहे थे कि राहुल और स्टालिन एक मंच पर आएंगे तो उसका असर ज्यादा होगा। लेकिन राहुल ने मंच साझा नहीं किया। चुनाव की घोषणा के पहले से दोनों पार्टियों के बीच सीट बंटवारे को लेकर जो विवाद हुआ और कांग्रेस के नेताओं खास कर मणिकम टैगोर ने जो लाइन पकड़ी है, माना जा रहा है कि राहुल गांधी उसी लाइन पर चल रहे हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि स्टालिन ने राहुल को मैसेज पहुंचवाया था कि वे मणिकम टैगोर को चुप कराएं। लेकिन राहुल ने कुछ नहीं कहा। अब तो यहां तक कहा जाता है कि टैगोर ही राहुल को गो टू मैन हैं। केसी वेणुगोपाल को भी टैगोर के जरिए ही मैसेज जा रहा है। ऐसे में संभव नहीं था कि अगर मणिकम टैगोर नहीं चाहते हैं तो राहुल गांधी मंच साझा करें। तमिलनाडु कांग्रेस के नेता इसे आगे की पोजिशनिंग बता रहे हैं। हालांकि अभी डीएमके और अन्ना डीएमके का विकल्प नहीं बन पाई हैं दोनों राष्ट्रीय पार्टियां।
