कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलने का मुद्दा एक बार फिर तेज हो गया है। माना जा रहा है कि पांच राज्यों के चुनाव की वजह से इसे विराम मिला था। उप मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार को असम के चुनाव में लगाया गया था। कहा जा रहा था कि चुनाव नतीजों के बाद कर्नाटक में नए सिरे से सीएम बदलने की मुहिम शुरू होगी। लेकिन यह मुहिम उससे पहले ही शुरू हो गई है। कर्नाटक के दो दर्जन से ज्यादा विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि करीब 40 विधायक दिल्ली पहुंचे। वे कई दिन से दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में रहे। उसके बाद राहुल गांधी से मिलने का समय तय हुआ।
इस सवाल को छोड़ दें कि कौन उन्हें दिल्ली लेकर आया और किसने होटल का बंदोबस्त किया तब भी सवाल है कि इतनी बड़ी संख्या में विधायकों के दिल्ली में होने का क्या अर्थ है? वह भी ऐसे राज्य के विधायक, जहां से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आते हैं। कर्नाटक का मामला तो उनकी पहल से सुलझ जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। कहा जा रहा है कि ये विधायक मंत्रिमंडल में फेरबदल की मांग लेकर आए हैं और कह रहे हैं कि वरिष्ठ नेताओं को मंत्री बनाया जाए। लेकिन असली मामला मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को सीएम बनाने का है। गौरतलब है कि ढाई साल पर सत्ता हस्तांतरण की बात पहले दिन से कही जा रही है। अब ढाई साल की सीमा बीत गई है। उधर कर्नाटक में दो सीटों के उपचुनाव हैं। अगर उनके नतीजे कांग्रेस के अनुकूल नहीं आते हैं तो सिद्धारमैया की मुश्किलें बढ़ेंगी।
