राज्यसभा के उप सभापति के चुनाव की तारीख तय हो गई है। बताया जा रहा है कि तीन दिन के सत्र के दूसरे दिन यानी 17 अप्रैल को राज्यसभा के उप सभापति का चुनाव होगा। नौ अप्रैल को हरिवंश नारायण सिंह के रिटायर होने की वजह से पद खाली हुआ है। इस तरह उप सभापति का पद खाली होने के आठ दिन के भीतर उस पर चुनाव हो जाएगा। अगर सब कुछ ठीक रहा तो फिर से हरिवंश नारायण सिंह उप सभापति हो जाएंगे क्योंकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनको उच्च सदन के लिए मनोनीत कर दिया है। उन्होंने मनोनयन के दिन ही यानी 10 अप्रैल को शपथ भी ले ली।
सो, इसमें समस्या नहीं है कि उप सभापति का चुनाव हो जाएगा। लेकिन सवाल है कि लोकसभा के उपाध्यक्ष का क्या होगा? सरकार ने जितनी तत्परता उप सभापति के चुनाव में दिखाई है वैसी तत्परता उपाध्यक्ष के लिए क्यों नहीं दिखाई जा रही है? गौरतलब है कि लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद सात साल से खाली है। पिछली यानी 17वीं लोकसभा में उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं हुआ। पूरे पांच साल तक यह पद खाली रहा। 18वीं लोकसभा का भी दो साल पूरा होने वाला है। इस तरह सात साल से एक संवैधानिक पद को खाली रखा गया है। संसद और संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा ऱखने का दावा करने वाली सरकार इस बार भी उपाध्यक्ष का चुनाव कराने की जल्दी में नहीं दिख रही है। जिस तरह के हालात हैं और सरकार की समर्थक पार्टियों से पक्ष व विपक्ष से तटस्थ पार्टियों की जितनी संख्या है। उसे देखते हुए लग नहीं रहा है कि सरकार इस बार भी चुनाव कराएगी।
