सांसदों को मोदी की चिट्ठी का मतलब

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों को चिट्ठी लिखी है और उनसे महिला आरक्षण कानून को लागू करने में मदद मांगी है। प्रधानमंत्री ने जो बातें लिखी हैं उनका सार यह है कि 2029 से महिला आरक्षण लागू होना चाहिए और इससे लोकतंत्र को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने सभी सांसदों से एकजुट होकर इसके लिए जरूरी संशोधन को पास कराने की अपील की है और कहा है कि जो भी सांसद इसे पास कराने में साझीदारी बनेंगे वे इस पर गर्व महसूस करेंगे। इसे ऐतिहासिक मौका बताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए। यह अलग बात है कि वे भाजपा और देश की कमान 12 साल से संभाल रहे हैं लेकिन उनकी पार्टी ने इस अवधि में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कुछ भी नहीं किया है। उन्होंने भी तय किया है कि महिलाओं की भागीदारी तभी बढ़ेगी, जब कानून बनेगा। बहरहाल, वह अलग मामला है।

सवाल है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस चिट्ठी का क्या मतलब है? इस सवाल को ऐसे भी पूछा जा सकता है कि अगर कोई ऐसा व्यक्ति, जिसे इस पूरे मामले का संदर्भ नहीं पता हो वह इस चिट्ठी की किस तरह से व्याख्या करेगा? जिनको महिला आरक्षण के लिए पास किए गए नारी शक्ति वंदन कानून के बारे में ज्यादा नहीं पता है और सरकार अब जो संशोधन लाने जा रही है उसके बारे में भी सिर्फ इतना पता है कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने जा रही है उसको प्रधानमंत्री की चिट्ठी देख कर लगेगा कि सारे सांसद महिला आरक्षण का विरोध करते हैं और सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि महिला आरक्षण लागू हो। इसलिए उन्होंने सबको चिट्ठी लिख कर अनुरोध किया है कि वे इसका समर्थन करेंगे। अगर सभी सांसदों के बारे में यह धारणा नहीं बने तब भी कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के बारे में यह राय जरूर बनेगी कि वे महिला आरक्षण के विरोधी हैं इसलिए प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख कर उनसे अपील करनी पड़ रही है। तभी

जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। भारतीय संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों की सहमति से महिला आरक्षण कानून पास हुआ है। सितंबर 2023 में सभी पार्टियों ने नारी शक्ति वंदन कानून का समर्थन किया था। लेकिन खुद सरकार ने उसे लागू करने के लिए कई शर्तें लगाई थीं। उसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था। तब भी विपक्ष ने इस पर सवाल उठाया था। लेकिन सरकार अपने एजेंडे से काम कर रही थी। जब 2024 में एजेंडा बिगड़ गया तो अब महिला आरक्षण 2029 में ही लागू करना है। इसलिए 2023 में संसद के पूर्ण समर्थन से पास कानून को बिना लागू हुए संशोधित किया जा रहा है। तभी प्रधानमंत्री का चिट्ठी लिखना विशुद्ध रूप से राजनीति है। उन्होंने राजनीति के तहत चिट्ठी लिखी ताकि देश में यह धारणा बने कि प्रधानमंत्री कितनी शिद्दत से महिला आरक्षण लागू करना चाह रहे हैं। उन्होंने इसके लिए अखबारों में लेख भी लिखा और लेख लिखने के बाद एक वीडियो संदेश जारी करके लोगों से लेख पढ़ने की अपील भी की। सोचें, अपने राजनीतिक लाभ के लिए सरकार ने 2024 के चुनाव से ठीक पहले महिला आरक्षण कानून लागू किया। जब 2024 के चुमाव में लाभ नहीं मिला तो अब आगे के चुनाल में लाभ के लिए उसे 2029 में ही लागू करने की पहल की गई है। पहले जब कानून 10 साल आगे के लिए बनाया गया तब भी मोदी महिला आरक्षण के चैंपियन थे और अब जल्दी लागू करना है तब भी चैंपियन हैं। वह नैरेटिव भी सही था और यह भी सही है! विपक्ष कैसे लड़ पाएगा?


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