नीतीश के हाथ में अब कुछ भी नहीं

Categorized as राजनीति

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को पार्टी के विधायकों, सांसदों की बैठक बुलाई तो उसमें कहा कि सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा और वे दिल्ली से पार्टी के कामकाज पर नजर रखेंगे। उनसे ज्यादा उनके साथ वाले नेताओं ने भरोसा दिलाने की कोशिश की। लेकिन हकीकत यह है कि नीतीश कुमार के हाथ में अब कुछ भी नहीं है। उनको मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए भाजपा ने पिछले 12 साल से जो अभियान चला रहा था उसमें कामयाब होने के बाद भाजपा ने यह भी सुनिश्चित किया है कि नीतीश की मोलभाव की क्षमता को भी जीरो कर दिया जाए। तभी भाजपा ने सत्ता में साझीदारी के पुराने फॉर्मूले को मानने से इनकार कर दिया है। जानकार सूत्रों का कहना है कि जिस मॉडल पर नीतीश की सरकार बनी थी उस मॉडल पर भाजपा की सरकार नहीं बनेगी। कम से कम दो मामलों में भाजपा ने इसे साफ कर दिया है।

पहला मामला स्पीकर का है। नीतीश कुमार की पार्टी की ओर से कहा गया कि भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा तो स्पीकर जनता दल यू का होगा। बताया जा रहा है कि भाजपा ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ध्यान रहे इससे पहले नीतीश कुमार की पिछली दो सरकारों में इसी फॉर्मूले पर भाजपा का स्पीकर बनता था। पहले विजय सिन्हा बने, जो अभी उप मुख्यमंत्री हैं, फिर नंदकिशोर यादव स्पीकर हुए, जिनको अभी नगालैंड का राज्यपाल बनाया गया है। इसके बाद 2024 में भाजपा की सरकार बनी तो प्रेम कुमार स्पीकर बने। लेकिन अब भाजपा ने साफ कर दिया है कि सीएम भी उसी का होगा और स्र्पीकर भी उसी का होगा। भाजपा ने बड़ी कृपा दिखाते हुए कहा कि विधान परिषद में नीतीश की पार्टी का सभापति बनाया जा सकता है। हालांकि अब नीतीश की मानसिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे कोई खेल कर सकें और उनके सभी करीबी नेता भाजपा के साथ ही हैं फिर भी भाजपा जोखिम नहीं ले रही है। आखिर नीतीश की पार्टी के 85 विधायक हैं।

दूसरा मुद्दा गृह मंत्रालय का है। पिछले साल सरकार बनी और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हुए तो भाजपा ने गृह मंत्रालय पर दावा कर दिया। इससे पहले गृह मंत्रालय हमेशा मुख्यमंत्री के पास रहता था। लेकिन इस बार भाजपा ने यह मंत्रालय अपने पास रखा। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को गृह विभाग का जिम्मा मिला। इसी फॉर्मूले पर नीतीश की पार्टी गृह मंत्रालय की मांग कर रही है। लेकिन भाजपा ने इनकार कर दिया है। बिहार में कानून व्यवस्था को बहुत अच्छा करने के अपने एजेंडे का हवाला देकर भाजपा ने कहा है कि गृह मंत्रालय उसके पास ही रहेगा। इसके अलावा भाजपा वित्त भी मागेंगे लेकिन हो सकता है कि उस पर समझौता कर लिया जाए।


Previous News Next News

More News

रूबियो की नजर में भारत सूडान जैसा!

September 27, 2026

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के अधिकारी भारत को क्या समझते हैं, यह धीरे धीरे और स्पष्ट होता जा रहा है। ट्रंप ने खुद जिस तरह से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत किया है और विवाद के मुद्दों को किनारे करके उनके साथ दोस्ती बढ़ाई है वह भारत के लिए अलग चिंता का…

अमेरिकी दबाव में आतंकवादी छोड़े!

September 27, 2026

एक जाने माने सामरिक विशेषज्ञ ने भारत को ‘पेरेनियल सॉफ्ट स्टेट’ यानी ‘चिरंतन नरम देश’ कहा है। पंडित नेहरू के समय से भारत को सॉफ्ट स्टेट माना जाता है। भारत की नीतियां कभी भी टकराव और हमले वाली नहीं रही हैं। इसकी जड़ें भारत के सनातन इतिहास में खोजी जाती हैं और बड़े गर्व से…

मंगल पांडेय और मालवीय एडजस्ट किए गए

September 27, 2026

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम की घोषणा हुई तो उसमें चौंकाने वाली बातें बहुत कम थी। लेकिन दो नेताओं को टीम से बाहर कर दिए जाने पर सबसे ज्यादा चर्चा हुई थी। भाजपा की बदनाम आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय को हटा दिया गया था और आईटी सेल का नाम बदल…

शाह और योगी में सब ठीक है

September 27, 2026

शुक्रवार को दिल्ली से सटे नोएडा की एक तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हुई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी और उनके लिए काम करने वाले इकोसिस्टम ने इसे सोशल मीडिया में बहुत बड़ा मुद्दा बना दिया। तस्वीर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की थी। मौका था नोएडा में…

लोजपा के बाद जदयू ने बनाया दबाव

September 27, 2026

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी की बिहार की सहयोगी पार्टियां भाजपा पर दबाव बना रही हैं। पहले केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोजपा ने उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने का ऐलान किया तो अब नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यू ने कहा है कि वह भी उत्तर प्रदेश में…

logo