पंजाब के कारोबारी और ट्राइडेंट समूह के प्रमुख राजिंदर गुप्ता कोई 20 साल से राजनीतिक हलके में घूम रहे थे। पहले वे कांग्रेस के साथ रहे और फिर आम आदमी पार्टी के साथ गए। आखिरकार आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने उनको करीब तीन साल के लिए राज्यसभा भेजने का फैसला किया। यह भी कहा जा रहा है कि संजीव अरोड़ा के साथ भी तीन साल का समझौता था। तीन साल वे राज्यसभा रहे और उसके बाद उनको विधानसभा का चुनाव लड़ा कर राज्य सरकार में मंत्री बना दिया गया। उनके इस्तीफे से खाली हुई सीट पर अब राजिंदर गुप्ता को उच्च सदन में भेजा जा रहा है। अगर फिर से आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब में लौटी तो राज्यसभा जाने वाले लोग दूसरे होंगे।
बहरहाल, जो काम कांग्रेस नहीं कर सकी वह काम काम केजरीवाल ने किया है। कांग्रेस के कई नेता राजिंदर गुप्ता को राज्यसभा भेजने के प्रयास में लगे थे। जानकार सूत्रों का कहना है कि एक महासचिव ने इसके लिए बहुत प्रयास किया। लेकिन पंजाब की कैप्टेन अमरिंदर सिंह सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा दिलाने से ज्यादा वे कुछ नहीं कर पाए। ध्यान रहे कांग्रेस की सरकार के समय ही 2007 में राजिंदर गुप्ता को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उसके बाद जब प्रदेश में आम आदमी पार्टी का उभार हुआ तो वे उसके साथ चले गए। वहां भी उनको कुछ पद देकर राज्यमंत्री वाला दर्जा दिया गया। लेकिन उन्होंने राज्यसभा का प्रयास जारी रखा। अब केजरीवाल ने उनकी यह इच्छा पूरी की है। केजरीवाल एक एक करके पंजाब के उद्योगपतियों और कारोबारियों की राज्यसभा जाने की इच्छा पूरी कर रहे हैं।
