किस नैरेटिव की बात कर रहे हैं सान्याल?

Categorized as राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापारिक सलाहकार पीटर नवारो की बात पर बहुत दिलचस्प प्रतिक्रिया दी। पीटर नवारो ने पिछले दिनों कहा कि रूस से तेल खरीदने के भारत के फैसले का लाभ भारत के ब्राह्मण उठा रहे हैं और देश के बाकी लोगों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। नवारो के इस बयान की सबने आलोचना की। कांग्रेस और शिव सेना के साथ साथ प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकारों में से एक संजीव सान्याल ने भी इसकी आलोचना का। हालांकि उससे पहले पीटर नवारो ने भारत पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया था और कहा था कि भारत रूस का तेल खरीद कर पुतिन के काले धन को सफेद कर रहा है। यह बड़ा आरोप था, जिसका जवाब प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकारों की ओर से दिया जाना चाहिए था। लेकिन नहीं दिया गया।

बहरहाल, रूस के तेल से ब्राह्मणों के लाभ कमाने की बात पर प्रतिक्रिया आई और कहा गया कि इससे पता चल रहा है कि अमेरिका में कौन लोग बैठ कर नैरेटिव बना रहे हैं। उनकी बात इसलिए अहम है क्योंकि इस बात को सहज रूप से अनदेखा भी किया जा सकता था क्योंकि हो सकता है कि अंग्रेजी में या अमेरिकी नैरेटिव में एलीट्स को ब्राह्मण कह दिया गया हो। नवारो के कहने का आशय यह हो सकता है कि भारत के एलीट्स यानी बड़े लोग पैसे कमा रहे हैं और आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

लेकिन ऐसा मान कर नवारो के बयान को खारिज नहीं किया गया। तभी सवाल है कि क्या संजीव सान्याल यह समझ रहे हैं कि ब्राह्मण शब्द का इस्तेमाल जान बूझकर किया गया और उसका कोई राजनीतिक मकसद है? क्या पीटर नवारो की बात भारत की घरेलू राजनीति से जुड़ती है और इसका जातीय ध्रुवीकरण से कोई लेना देना है? यह सवाल इसलिए है क्योंकि भारत में विपक्षी पार्टियां केंद्र सरकार पर पिछड़े, गरीबों, वंचितों, दलितों, आदिवासियों की अनदेखी के आरोप लगा रही हैं, संविधान बदलने के आरोप लगा रही हैं और आरक्षण छीनने के आरोप लगा रही हैं। ऐसे में अगर मोदी सरकार में ब्राह्मण के लाभ कमाने का नैरेटिव बनता है तो अंततः उसका नुकसान भाजपा को होगा। यह भी ध्यान रखने की बात है कि भाजपा के नेता बार बार आरोप लगा रहे हैं कि अमेरिका और यूरोप के देशों में ऐसे तत्व हैं, जो भारत विरोधी साजिश में शामिल हैं और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के तार उनसे जुड़े हैं। तभी ऐसा लग रहा है कि संजीव सान्याल ने ब्राह्मण को एलीट के संदर्भ में देखने की बजाय इसे अगड़ी जाति के नजरिए से देखा और जाति की राजनीति के नैरेटिव से जोड़ा।


Previous News Next News

More News

वंदे मातरम पर ‘इंडिया’ ब्लॉक में मतभेद

September 13, 2026

कांग्रेस पार्टी ने अचानक वंदे मातरम को बड़ा मुद्दा बना दिया है और इस पर टकराव पैदा कर रही है। यह अचानक हुआ इसलिए लग रहा है क्योंकि संसद के मानसून सत्र में कांग्रेस इस पर अपनै स्टैंड स्पष्ट करने से बच रही थी। कांग्रेस के नेता इस बात से खुश थे कि जंतर मंतर…

केजरीवाल, पंकज गुप्ता और एनडी गुप्ता

September 13, 2026

भारत में राजनीति को जाति के स्टीरियोटाइप में देखा जाता है। जब भी किसी पार्टी के संगठन के पदाधिकारियों की घोषणा होती है तो देखा जाता है कि उसमें जातीय समीकरण का कितना ध्यान रखा गया है। ऐसे की सरकार के मंत्रियों के चयन में भी सामाजिक, क्षेत्रीय संतुलन की बात होती है। हर जाति…

टकराव की राजनीति बढ़ा रहे हैं केजरीवाल

September 13, 2026

आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल इन दिनों पूरी तरह से पंजाब की राजनीति में लगे हैं। वे रैलियां और चुनावी कार्यक्रम कर रहे हैं और साथ साथ टिकट बंटवारे से लेकर चुनावी रणनीति बनाने में भी लगे हैं। राघव चड्ढा और उनसे भी ज्यादा संदीप पाठक के पार्टी छोड़ने के बाद केजरीवाल पर…

धीरेंद्र शास्त्री ने भाजपा का नुकसान कर दिया

September 13, 2026

पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के बाद बड़े धूमधड़ाके से बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री बंगाल पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार थी तो उनको राज्य में नहीं आने दिया जाता था। उन्होंने यह भी कहा कि अब सरकार बदल गई है और लोगों का मन बदलना चाहिए। सोचें, बंगाल में लोगों…

आर्थिक विकासः इतने बंटे हुए क्यों हैं अहसास!

September 13, 2026

लोग यह पूछने लगे हैं कि अगर तेज गति से आर्थिक वृद्धि दर्ज हो रही है, तो वह आम जिंदगी में महसूस क्यों नहीं हो रही है? आंकड़ों की साख का सवाल तो पुराना है, मगर ताजा बहस के क्रम में आम तजुर्बे के खिलाफ आए आंकड़ों पर सरल, लेकिन कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण सवाल उठाए…

logo