एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही सभी आरोपों का जवाब दूंगा : चंपत राय

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श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वह अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों का बिंदुवार जवाब देंगे। 

इस बीच, देर शाम को एसआईटी को कथित तौर पर सौंपा गया चंपत राय का एक हस्ताक्षरित बयान सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें उन्होंने मंदिर में चढ़ावे की गणना की प्रक्रिया में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। 

इससे पहले, ‘राम भक्तों’ को संबोधित एक हस्तलिखित पत्र में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने कहा कि उनके खिलाफ ‘‘निराधार आरोप’’ लगाए गए हैं। 

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पत्र की तस्वीर साझा करते हुए रामचरितमानस की चौपाई उद्धृत की धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी।  

राय ने कहा कि आरोपों के बाद उन्होंने ‘मौन धारण’ किया हुआ है।  उन्होंने बताया कि एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट ट्रस्ट की आम बैठक में प्रस्तुत की जा चुकी है।  उनके अनुसार, यह रिपोर्ट पहले ‘अत्यंत गोपनीय’ के रूप में चिह्नित थी, लेकिन बाद में सार्वजनिक हो गई। 

उन्होंने कहा कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वह उठाए जा रहे सभी मुद्दों पर बिंदुवार जवाब देंगे और ‘‘पूरा सच’’ जनता के सामने आएगा। 

राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन का मामला सात जून को सामने आया था।  उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 

अब तक चढ़ावे की गणना प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले की जांच जारी है। 

अपने बारे में जानकारी देते हुए राय ने कहा कि संगठन की ओर से प्रतिनियुक्त किए जाने के बाद वह अक्टूबर 1991 से अयोध्या में कार्य कर रहे हैं तथा एक पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में उनका 45 वर्षों का जीवन हमेशा ‘‘खुली किताब’’ रहा है। 

सोशल मीडिया पर सामने आए हस्ताक्षरित बयान में राय ने मंदिर में चढ़ावे की गणना की प्रक्रिया में भारतीय स्टेट बैंक की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। 

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एसआईटी को संबोधित इस बयान में उन्होंने छह फरवरी, 2025 की ‘‘गणना प्रक्रिया के लिए संयुक्त रूप से निर्धारित दिशा-निर्देश’’ शीर्षक वाले दस्तावेज को रिकॉर्ड पर लेने का अनुरोध करते हुए उसे अस्वीकार कर दिया।  इस दस्तावेज पर ट्रस्टी अनिल मिश्रा और एसबीआई की अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक के हस्ताक्षर बताए गए हैं। 

राय ने कहा कि वह इस दिशा-निर्देश दस्तावेज से ‘‘पूरी तरह असहमत’’ हैं।  उनका दावा है कि दस्तावेज में इसकी प्रति ट्रस्ट के महासचिव को भेजे जाने का उल्लेख है, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी 13 जून, 2026 को ट्रस्ट के लेखा कार्यालय के माध्यम से मिली। 

उन्होंने यह भी कहा कि इन दिशा-निर्देशों पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं, जबकि अगस्त 2020 से जून 2026 के बीच हुए सभी समझौतों पर केवल उनके और संबंधित पक्ष के अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर हैं। 

राय ने सवाल उठाया कि इस दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर क्यों नहीं कराए गए।  उन्होंने कहा कि यदि उस समय वह अयोध्या से बाहर थे, तो अधिकारियों को उनके लौटने का इंतजार करना चाहिए था। 

उन्होंने नौ फरवरी, 2024 को बैंक के साथ हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) का उल्लेख करते हुए कहा कि उसके प्रत्येक पृष्ठ पर उनके हस्ताक्षर हैं और उसमें गणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरे तथा लोहे की जाली वाला प्रवेश द्वार जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं का प्रावधान था। 

राय ने आरोप लगाया कि बैंक ने चढ़ावे की गणना मेज-कुर्सी पर बैठकर करने की सलाह दी थी, जिससे चोरी की घटनाओं को बढ़ावा मिला। 

उन्होंने कहा कि मामला सामने आने के बाद मेजें हटा दी गईं और इसके बाद चढ़ावे की गणना फर्श पर बैठकर की जाने लगी। 

राय ने यह भी आरोप लगाया कि दिशा-निर्देशों में उल्लिखित अनिवार्य सुरक्षा उपाय, जैसे तलाशी लेना, बिना जेब वाले कपड़े पहनना और अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल, बैंक ने लागू नहीं किए। 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बैंकिंग प्रक्रियाओं की पूरी तरह अनदेखी की गई और यह सवाल उठाया कि चढ़ावे की गणना के कार्य में बैंक ने हाउसकीपिंग कर्मचारियों को क्यों लगाया। 

राय का दावा है कि दिशा-निर्देश जल्दबाजी में तैयार किए गए और व्यवहार में लागू ही नहीं किए गए।  उन्होंने कहा कि यदि बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को इनके बारे में जानकारी होती तो इन खामियों का समय रहते पता चल जाता। 

इस संबंध में चंपत राय से संपर्क करने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।  हालांकि, उनके करीबी लोगों ने पुष्टि की कि वह ‘मौन’ धारण किए हुए हैं और एकांत में रह रहे हैं। 

राम मंदिर ट्रस्ट ने सोमवार को हुई बैठक में ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव चुना और चढ़ावा प्रबंधन प्रणाली में व्यापक सुधार कर श्रद्धालुओं का विश्वास बहाल करने का आश्वासन दिया। 

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने चढ़ावा पात्रों से हुई कथित चोरी को ट्रस्ट के लिए ‘‘गहरे दुख और शर्मिंदगी’’ का विषय बताया।  हालांकि, उन्होंने चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बावजूद राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण में उनके योगदान की सर्वसम्मति से सराहना किए जाने की जानकारी दी। 

गिरी ने चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि उनकी नजर में वह ‘निर्दोष’ हैं।  उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के लिए उनके ‘त्यागपूर्ण जीवन’ की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि उनसे कोई गलती हुई, तो वह केवल गलत लोगों पर भरोसा करने की थी। 

Pic Credit : ANI


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