नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जिस समझौता ज्ञापन पर 17 जून को दस्तखत हुआ उस पर आगे की वार्ता के लिए दोनों देशों के वार्ताकार कतर की राजधानी दोहा पहुंच गए हैं। हालांकि ईरान ने कहा है कि वह आगे की तकनीकी बातचीत के लिए नहीं जा रहा है, बल्कि कतर में फ्रीज किया गया अपना पैसा छुड़ाने जा रहा है। उसने कहा है कि कोई बातचीत नहीं होगी। लेकिन अमेरिका कह रहा है कि बातचीत होगी।
ईरान ने बहुत जोर देकर कहा है कि उसका प्रतिनिधिमंडल अमेरिका से सीधी बातचीत नहीं करेगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि उनका मकसद अभी विदेशों में फ्रीज किया फंड जारी कराना है। जब तक इस दिशा में कोई काम नहीं होगा, तब तक शांति समझौते पर आगे बातचीत नहीं होगी। वहीं अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर दोहा पहुंच गए हैं।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल आमने सामने नहीं बैठेंगे, बल्कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत मध्यस्थों के जरिए होगी। युद्ध शुरू होने से पहले ऐसे ही वार्ता हो रही थी। 17 जून को एमओयू पर दस्तखत के बाद स्विट्जरलैंड में पहली बैठक हुई थी, जिसमें उप राष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हुए थे। एमओयू के मुताबिक ईरान अपने एनरिच्ड यूरेनियम के स्टॉक को कम करेगा। बदले में अमेरिका ईरानी तेल निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में राहत देगा, होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने की कोशिश करेगा और दोनों देशों को अंतिम समझौते के लिए 60 दिन का समय मिलेगा।
बहरहाल, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने मंगलवार को कहा कि होर्मुज की खाड़ी से जुड़े मामलों में किसी भी विदेशी देश, यहां तक कि फ्रांस के भी दखल देने की जरूरत नहीं है। बघई ने फ्रांस का नाम इसलिए लिया क्योंकि हाल के दिनों में फ्रांस ने होर्मुज की सुरक्षा को लेकर बयान दिए थे। फ्रांस का कहना था कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका होनी चाहिए, ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे।
