फड़नवीस क्या उद्धव के संकटमोचन बनेंगे

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वैसे तो पूरे देश की ही राजनीति दिलचस्प हो गई है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि भाजपा के अंदर का भितरघात खुल कर दिखने लगा है। नेताओं की महत्वाकांक्षाएं आपस में टकराने लगी हैं, जिससे अंदर की खबरें बाहर जा रही हैं और किसी न किसी की शह से अखबारों में खबरें छप भी रही हैं। सोशल मीडिया में भी कई ऐसे मुद्दों पर बहस हो रही है और मुद्दे वायरल हो रहे हैं, जिनको पहले दबा दिया जाता था या काउंटर नैरेटिव के जरिए कमजोर किया जाता था। लेकिन पूरे देश में जिस राज्य की राजनीति सबसे दिलचस्प दिख रही है वह महाराष्ट्र है। साफ दिख रहा है कि दिल्ली में कोई है, जो एकनाथ शिंदे को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है और महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस उस प्रयास को विफल करने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली के चाणक्य और महाराष्ट्र के चाणक्य की बात भी हो रही है। कहा जा रहा है कि शरद पवार के बाद देवेंद्र फड़नवीस महाराष्ट्र के नए चाणक्य हैं। नए चाणक्य की महत्वाकांक्षा चंद्रगुप्त बनने की है। कई और लोगों की ऐसी महत्वाकांक्षा है। लेकिन वह अलग मामला है।

अभी महाराष्ट्र में ऐसा दिख रहा है कि देवेंद्र फड़नवीस अपनी स्वतंत्र सत्ता बचाए रखना चाहते हैं लेकिन एकनाथ शिंदे उनके लिए चुनौती पैदा कर रहे हैं। शिंदे ने उद्धव ठाकरे की पार्टी दोबारा तोड़ी है। चार साल के भीतर दूसरी बार टूट हुई है। इस बार छह लोकसभा सांसद शिंदे के साथ चले गए हैं। इसके साथ ही शिंदे की शिव सेना ने एनडीए में जनता दल यू को पीछे छोड़ दिया है। वह अब 13 सांसदों वाली पार्टी बन गई है। इसी तरह कहा जा रहा है कि शिंदे की नजर अब उद्धव ठाकरे के 20 में से 14 विधायकों पर है। अगर ऐसा होता है कि महाराष्ट्र विधानसभा में शिंदे के विधायकों की संख्या 57 से बढ़ कर 71 हो जाएगी। हालांकि 288 के सदन में भाजपा के अपने 132 विधायक हैं। ऊपर से देवेंद्र फड़नवीस की सरकार को सुनेत्रा पवार की पार्टी का समर्थन भी हासिल है। सबको पता है कि सुनेत्रा परिवार और उनका परिवार देवेंद्र फड़नवीस के हिसाब से राजनीति कर रहा है।

फिर भी कहा जा रहा है कि फड़नवीस नहीं चाहते हैं कि एकनाथ शिंदे स्वतंत्र रूप से इतने मजबूत हो जाएं कि आगे चुनौती खड़ी कर सकें। इसलिए फड़नवीस की कोशिश उद्धव ठाकरे को बचाने की है। पिछले दिनों उद्धव प्रदेश के तीन दिन के दौरे पर निकले तो नागपुर जाने के क्रम में हवाईजहाज में उनको देवेंद्र फड़नवीस मिल गए। कहा गया कि यह संयोग से हुई मुलाकात है। लेकिन राजनीति में ऐसे संयोग अपने आप कम ही घटित होते हैं। उद्धव के साथ उनके बेटे आदित्य ठाकरे भी थे। इस ठाकरे परिवार ने फड़नवीस के साथ फोटो खिंचवाई, वीडियो भी बनी और फड़नवीस ने कहा कि यह सबसे बड़ी खबर होगी। सचमुच वह सबसे बड़ी खबर बन गई। बाद में उद्धव ने इसमें तड़का लगाया और कहा कि एकनाथ शिंदे, जो कर रहे हैं वह ऑपरेशन टाइगर नहीं है, बल्कि ऑपरेशन देवेंद्र है। यानी शिंदे अपने अभियान से उद्धव को कमजोर नहीं कर रहे हैं, बल्कि देवेंद्र फड़नवीस को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। जो हो लेकिन इतना तय बताया जा रहा है कि फड़नवीस सत्ता का संतुलन चाहते हैं और इसलिए वे उद्धव ठाकरे के रूप में एक बफर बनाए रखने की कोशिश करेंगे। कहा जा रहा है कि उद्धव की पार्टी के लोगों को अब फड़नवीस से ही उम्मीद है।


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