नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली और एनसीआर में सर्दियों में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई की। इस सुनवाई में बेहद सख्त रुख दिखाते हुए सर्वोच्च अदालत ने किसानों को जवाबदेह बनाने की जरुरत बताई। अदालत ने कहा कि सिर्फ जुर्माना लगाना काफी नहीं है। इस मामले में अदालत की मदद कर रहीं न्याय मित्र अपराजिता सिंह ने कहा कि पराली जलाने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी के लाभ से बाहर करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकारें पराली प्रबंधन में किसानों की मदद करें।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में कहा कि किसान अन्नदाता हैं लेकिन पर्यावरण को बचाना भी जरूरी है। इस मामले में अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को होगी। बुधवार को सुनवाई में कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा कि जो किसान पराली न जलाने के सरकारी आदेश का उल्लंघन करते हैं, उनको गिरफ्तार क्यों नहीं करते? सिर्फ जुर्माना लगाने से काम नहीं चलेगा, किसानों को जवाबदेह बनाना जरूरी है।
चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि देश की प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियां और राज्य सर्दियों से पहले तीन हफ्ते में वायु प्रदूषण से निपटने के उपाय बताएं। बेंच ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट यानी सीएक्यूएम, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड यानी सीपीसीबी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से कहा कि हर साल सर्दियों में प्रदूषण का लेवल खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है, इसे रोकने के लिए समय रहते कदम उठाना जरूरी है।
