फिर युद्ध का साया

Categorized as संपादकीय

ईरानी समाचार एजेंसी फारस की इस टिप्पणी ने सनसनी फैला दी है कि अब ईरान के पास परमाणु बम बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह राय ईरान के अपनी ताकत के नए आकलन को जाहिर करती है।

अमेरिका और ईरान के एक-दूसरे के ठिकानों पर हमला करने के साथ 14 सूत्री सहमति-पत्र (एमओयू) पर दस्तखत से अमन की जन्मी उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं। उलझे मुद्दों को हल करने के लिए स्विट्जरलैंड में शुरू हुई वार्ता का भविष्य अनिश्चित हो गया है। ईरान ने इन वार्ताओं को “पूर्णतः रद्द” करने की घोषणा कर दी है। इससे स्पष्ट है कि दोनों पक्षों ने एमओयू की परस्पर विरोधी व्याख्याएं कीं। दो ऐसे मुद्दे बने रहे, जिन पर उनके बीच न्यूनतम सहमति की भी गुंजाइश नहीं उभरी। पहला मुद्दा लेबनान पर इजराइली हमले रोकने का है। एमओयू के तहत इसके लिए इजराइल तैयार नहीं हुआ। उलटे उसने लेबनान की हिज्बुल्लाह विरोधी सरकार के साथ अलग समझौता कर लिया, जिससे ईरान ख़फा हो गया।

बहरहाल, इससे भी बड़ा मुद्दा होरमुज जलडमरुमध्य पर नियंत्रण का है। अमेरिका का दावा है कि एमओयू में ईरान वहां युद्ध-पूर्व अवस्था बहाल करने पर राजी हुआ है। जबकि ईरान का दावा है कि उसने इस जलमार्ग पर अपनी संप्रभुता छोड़ने की शर्त नहीं मानी है। इस जलमार्ग से परिवहन युद्ध-पूर्व अवस्था जैसा हो या ईरान के प्रशासनिक नियंत्रण में हो, इस मुद्दे पर टकराव बढ़ता गया है और अब दोनों पक्ष एक-दूसरे के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। स्पष्टतः यह 39 दिन के युद्ध के परिणाम पर दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी आकलन को इंगित करता है। ईरान खुद को विजेता मानता है। अतः वह जंग से हासिल रणनीतिक लाभ छोड़ने को तैयार नहीं है।

मगर अमेरिका का आकलन अलग है। इस बीच ईरानी समाचार एजेंसी फारस की इस टिप्पणी ने सनसनी फैला दी है कि ‘नई विश्व व्यवस्था में संक्रमण’ के दौरान ईरान के पास परमाणु बम बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह राय भी ईरान के इस आकलन का परिणाम है कि युद्ध से उसे नई ताकत मिली है, जिसका उसे भरपूर फायदा उठाना चाहिए। इन परिस्थितियों में युद्ध-पूर्व यथास्थिति को बहाल कर पश्चिम एशिया के मकड़जाल से निकल जाने की ट्रंप प्रशासन की इच्छा पूरी होने की कम ही संभावना है। नतीजतन, नए टकराव की पृष्ठभूमि मजबूत हो गई है।


Previous News Next News

More News

आप का अलायंस कांग्रेस के लिए खतरा

September 15, 2026

आम आदमी पार्टी की राजनीति का एक हिस्सा अपने चुनाव जीतने का तो है लेकिन साथ ही दूसरा हिस्सा कांग्रेस को कमजोर करते जाने का भी है। पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी ने गोवा और गुजरात में कांग्रेस का बड़ा नुकसान किया था। गुजरात में आप को 13 फीसदी के करीब वोट मिले थे,…

ब्रिक्स के लाइमलाइट से दूर रहे शाह

September 15, 2026

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए रात्रिभोज में शामिल हुए थे। वे अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ ही बस में सवार होकर भारत मंडपम पहुंचे थे। जेपी नड्डा, ओम बिरला, निर्मला सीतारमण आदि उसी बस में थे। हालांकि उससे पहले या उसके बाद…

ब्रिक्स से दक्षिण की राजनीति पर नजर

September 15, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान तमिल कवि तिरुवल्लुर की किताब तिरूवक्कुल की प्रति रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भेंट की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया भर के नेताओं का स्वागत जिस बैकग्राउंड में किया वह तमिलनाडु के रामनाथस्वामी मंदिर का था। हालांकि कहने को कहा जा सकता है कि हर…

नंदीग्राम में ममता का तीसरा उम्मीदवार

September 15, 2026

ममता बनर्जी विधानसभा की दो सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में किसी सीट से नहीं लड़ रही हैं। पहले माना जा रहा था कि वे चुनाव लड़ सकती हैं। हुमायूं कबीर ने उनको अपनी खाली की हुई सीट से लड़ने का प्रस्ताव दिया था। यह भी कहा जा रहा था कि वे नंदीग्राम से…

संघ परिवार: किस का पैरोकार?

September 15, 2026

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में कहा: “यदि कोई हिन्दू सोचे, कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं रहना चाहिए, तो वह हिन्दू नहीं है। यदि आप अपने को हिन्दू कहना चाहते हैं, तो आप को विश्वास होना चाहिए कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं।” पूछना चाहिए: यदि वे इतना अभेद…

logo