कानून का बदहाल राज

Categorized as संपादकीय

न्याय होने से पहले न्यूजक्लिक से जुड़े लोगों को गहरी यांत्रणा से गुजरना पड़ा। एक चलती हुई वेबसाइट मृतप्राय हो गई, दर्जनों कर्मचारियों की नौकरी गई, उनमें से बहुतों के यहां छापे पड़े। इनकी भरपाई कैसे होगी?

छह साल तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की यांत्रणा झेलने के बाद आखिरकार वेबसाइट न्यूजक्लिक को इंसाफ मिला। मुकदमा खारिज करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्त्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। कहा कि न्यूजक्लिक के खिलाफ ना सिर्फ जारी कार्यवाही दुर्भावनापूर्ण है, बल्कि यह स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता पर मनमाना हमला तथा शक्ति के दुरुपयोग का मामला भी है। ईडी के आरोपों को ‘पूर्णतः गढ़ा हुआ और निराधार’ ठहराते हुए न्यायालय ने कहा कि वेबसाइट के खिलाफ दूर से संकेत देने लायक भी कोई सबूत नहीं पेश नहीं किया गया। जबकि आरोप मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम के तहत लगाया गया था।

बुधवार को ही हाईकोर्ट की एक दूसरी बेंच ने जम्मू-कश्मीर के मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज पर यूएपीए के तहत जारी मुकदमे में जमानत दे दी। यह मामला पांच साल पुराना हो चुका है, मगर हाई कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अभी इसमें मुकदमे की कार्यवाही शुरू होने की दूर-दूर तक संभावना नहीं है। इसलिए उच्च न्यायालय ने ‘जेल अपवाद और बेल नियम’ का सिद्धांत लागू किया। ये दोनों मामले देश में कानून के राज और न्याय की भावना के रोजमर्रा के स्तर पर जारी उल्लंघन की मिसालें हैं। मुद्दा सिर्फ परवेज या उन जैसे लोगों को सताने का नहीं है। सवाल है कि उनके खिलाफ अभियोग पक्ष के पास अकाट्य साक्ष्य हैं, तो न्यायिक कार्यवाही में उन्हें सिद्ध कर कानून सज़ा दिलाने की तत्परता वह क्यों नहीं दिखाता? ऐसा नजरिया क्यों अपनाया गया है, जिससे प्रक्रिया को ही दंड बना देने का अस्वीकार्य चलन अस्तित्व में आया है?

यह न्यूजक्लिक की खुशकिस्मती है कि उस पर मुकदमा चला। बहरहाल, न्याय होने से पहले उसके संपादक एवं अन्य पदाधिकारियों को महीनों जेल में गुजारने पड़े, एक चलती हुई वेबसाइट मृतप्राय हो गई, दर्जनों कर्मचारियों की नौकरी गई, उनमें से बहुतों के घर पर छापे पड़े जिससे उनकी प्रतिष्ठा को भारी क्षति पहुंची। आखिर इन सबकी भरपाई कैसे होगी? अतः क्या अब वक्त नहीं आ गया है, जब निराधार आरोप गढ़ने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए? साथ ही जिनकी जिंदगी अस्थिर और परेशान होती है, उन्हें उचित मुआवजा देने का प्रावधान किया जाए?


Previous News Next News

More News

आप का अलायंस कांग्रेस के लिए खतरा

September 15, 2026

आम आदमी पार्टी की राजनीति का एक हिस्सा अपने चुनाव जीतने का तो है लेकिन साथ ही दूसरा हिस्सा कांग्रेस को कमजोर करते जाने का भी है। पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी ने गोवा और गुजरात में कांग्रेस का बड़ा नुकसान किया था। गुजरात में आप को 13 फीसदी के करीब वोट मिले थे,…

ब्रिक्स के लाइमलाइट से दूर रहे शाह

September 15, 2026

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए रात्रिभोज में शामिल हुए थे। वे अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ ही बस में सवार होकर भारत मंडपम पहुंचे थे। जेपी नड्डा, ओम बिरला, निर्मला सीतारमण आदि उसी बस में थे। हालांकि उससे पहले या उसके बाद…

ब्रिक्स से दक्षिण की राजनीति पर नजर

September 15, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान तमिल कवि तिरुवल्लुर की किताब तिरूवक्कुल की प्रति रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भेंट की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया भर के नेताओं का स्वागत जिस बैकग्राउंड में किया वह तमिलनाडु के रामनाथस्वामी मंदिर का था। हालांकि कहने को कहा जा सकता है कि हर…

नंदीग्राम में ममता का तीसरा उम्मीदवार

September 15, 2026

ममता बनर्जी विधानसभा की दो सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में किसी सीट से नहीं लड़ रही हैं। पहले माना जा रहा था कि वे चुनाव लड़ सकती हैं। हुमायूं कबीर ने उनको अपनी खाली की हुई सीट से लड़ने का प्रस्ताव दिया था। यह भी कहा जा रहा था कि वे नंदीग्राम से…

संघ परिवार: किस का पैरोकार?

September 15, 2026

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में कहा: “यदि कोई हिन्दू सोचे, कि भारत में कोई मुस्लिम नहीं रहना चाहिए, तो वह हिन्दू नहीं है। यदि आप अपने को हिन्दू कहना चाहते हैं, तो आप को विश्वास होना चाहिए कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं।” पूछना चाहिए: यदि वे इतना अभेद…

logo