गठबंधन का बंटा मन

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भाजपा का मुकाबला करने के लिए बना इंडिया गठबंधन आज उद्देश्यहीन नजर आता है। आपसी समझ, समन्वय, और साझापन की भावना गहराने के बजाय उसमें आपसी कड़वाहट और अविश्वास की भावना बढ़ी है।

इंडिया एलायंस की बैठक में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े शिव सेना नेता उद्धव ठाकरे ने पूछा कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) जैसी ऑनलाइन परिघटना क्यों लोगों का ध्यान खींचने में सफल रही, जबकि विपक्ष ऐसा नहीं कर पाया है? क्या इसलिए कि क्या लोगों का “हम में” भरोसा नहीं रहा? इकट्ठा हुए 23 विपक्षी दलों के नेता इस सवाल पर गंभीरता से आत्म-निरीक्षण करते, तो लंबे अंतराल के बाद हुई गठबंधन की बैठक किसी अधिक सार्थक नतीजे पर पहुंच पाती। हकीकत यही है कि सर्व-सत्तावान होती गई भाजपा का मुकाबला करने के लिए तीन साल पहले बना ये गठबंधन आज उद्देश्यहीन हो गया नजर आता है।

गुजरे वक्त के साथ आपसी समझ, समन्वय, और साझापन की भावना गहरी होने के बजाय गठबंधन में आपसी कड़वाहट और अविश्वास की भावना ज्यादा फैली हुई है। क्षेत्रीय दलों में कांग्रेस के व्यवहार को लेकर नाराजगी बढ़ी है और उसकी मंशा पर संदेह गहराया है। सोमवार की बैठक से ठीक पहले सीपीएम महासचिव एम.ए. बेबी ने सभी घटक दलों को पत्र लिखकर केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ राहुल गांधी की आक्रामक भाषा पर अपनी नाराजगी जताई। उसके पहले तमिलनाडु में कांग्रेस के ‘विश्वासघात’ से ‘आहत’ डीएमके बैठक के बहिष्कार का एलान कर चुका था। उससे भी पहले कांग्रेस से नाराजगी के कारण आम आदमी पार्टी इंडिया गठबंधन से हटने का फैसला ले चुकी थी।

सीजेपी परिघटना पर कांग्रेस समर्थक सोशल मीडिया हैंडल्स ने जिस तरह आक्रमण किया, उससे भी कई विपक्षी दल हैरत में पड़े। बैठक में ममता बनर्जी ने कहा कि विपक्षी दलों को सिविल सोसायटी के आंदोलनों की आलोचना करने के बजाय उसे प्रोत्साहित करना चाहिए। जाहिरा तौर पर इस टिप्पणी का उपरोक्त संदर्भ ही था। तीन साल पहले गठबंधन की एक कमी यह बताई गई थी कि उसके पास ठोस नीति एवं कार्यक्रम एवं कार्यक्रम का अभाव है। अब जबकि दलों के बीच का मन-मुटाव जग-जाहिर है, तो वो मुद्दा पृष्ठभूमि में चला गया है। उनका आपसी अविश्वास मुख्य मुद्दा बन गया है। इस माहौल के कारण ही गठबंधन ने जो पांच सूत्री फैसले लिए, उन्हें महज खानापूरी समझा गया है।


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