जापान में जोरदार जनादेश

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प्रधानमंत्री साने ताकाइची इसे पसंद करती हैं कि उनकी तुलना ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर से की जाए। जिस तरह थैचर ने ब्रिटेन की दिशा बदल दी थी, कुछ वैसा ही करने का वादा ताकाइची ने किया है।

लंबे समय बाद जापान में किसी नेता को दो तिहाई बहुमत मिला है। सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) को ऐसी कामयाबी चार महीने पहले प्रधानमंत्री बनीं साने ताकाइची ने दिलाई। दरअसल, जितनी बड़ी जीत एलडीपी को इस बार मिली, उतना गुजरे 70 वर्षों में कभी नहीं हुआ। जापान में 1955 में नया संविधान लागू होने के बाद से एलडीपी 66 वर्ष सत्ता में रही है। सिर्फ दो बार ऐसे मौके आए, जब वह दो-दो वर्ष के लिए सत्ता से बाहर हुई। मगर पिछले डेढ़ दशक में पार्टी की लोकप्रियता लगातार गिरी थी। आर्थिक गतिरुद्धता, बढ़ती सामाजिक समस्याओं, और धुर दक्षिणपंथ के उदय के कारण हालिया चुनावों में उसे पूर्ण बहुमत से वंचित रहना पड़ा।

इसीलिए रविवार को हुए चुनाव में उसे मिली बड़ी जीत ने दुनिया का ध्यान खींचा है। इससे ये बात पुष्ट हुई है कि उदारवाद और राष्ट्रवाद का उग्र एजेंडा पेश कर जापान के मतदाताओं में उत्साह पैदा करने में ताकाइची सफल रहीं। ताकाइची इसे पसंद करती हैं कि उनकी तुलना ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर से की जाए। जिस तरह थैचर ने ब्रिटेन की दिशा बदल दी थी, कुछ वैसा ही करने का वादा ताकाइची ने किया है। प्रधानमंत्री बनते ही ताइवान के सवाल पर उग्र बयान देकर चीन से टकराव बढ़ाते हुए उन्होंने देश में राष्ट्रवादी भावनाएं फैलाईं। इसे आगे बढ़ाते हुए उन्होंने सैन्य खर्च बढ़ाने का वादा किया। साथ ही जापान को परमाणु हथियार संपन्न देश बनाने के संकेत भी उन्होंने दिए।

उधर आर्थिक मोर्चे पर हर तरह के टैक्स में कटौती का वादा किया। इसमें आय कर से लेकर उपभोग कर तक शामिल हैं। कहा कि यह सब बजट घाटा बढ़ाते हुए किया जाएगा। जहां लोग अर्थव्यवस्था की घटती गई प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता, घटती उत्पादकता, गिरते जीवन स्तर, और बढ़ती गैर-बराबरी से वर्षों से परेशान हों, वहां इस तरह के वादों ने जादुई असर किया, तो उसे समझा जा सकता है। वैसे विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि रक्षा क्षेत्र को छोड़ दें, तो बाकी वादों को पूरा करना आसान नहीं होगा। लेकिन ये बाद की बात है। फिलहाल, तो ताकाइची की लहर चली है।


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