शांति से ऊर्जा समृद्धि?

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संचालक कंपनी पर अधिकतम जुर्माना 3000 करोड़ रुपये का ही लग सकेगा। नुकसान उससे ज्यादा हुआ, तो जुर्माना सरकार भरेगी। लेकिन जब स्वामित्व निजी कंपनी का होगा, तो पीड़ितों को मुआवजे का बोझ करदाताओं पर क्यों डाला जाना चाहिए?

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी निवेश के लिए खोलने का पेश बिल आज के चलन के मुताबिक ही है। मगर शांति (सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) विधेयक में हादसे की स्थिति में विदेशी सप्लायरों को जिम्मेदारी मुक्त करने का शामिल प्रावधान समस्याग्रस्त है। यह धारणा पहले से मौजूद है कि 2010 के सिविल लायबिलिटी ऑफ न्यूक्लियर डैमेज ऐक्ट के तहत लागू इस प्रावधान को डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के दबाव में बदला जा रहा है। ऐसी खबरें रही हैं कि ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए जो शर्तें लगाईं, उसमें यह भी शामिल था।

नए विधेयक में प्रावधान है कि परमाणु संयंत्र की संचालक कंपनी रिएक्टर और अन्य उपकरणों की सप्लायर कंपनी से अपने करार में दुर्घटना का दायित्व साझा करने का प्रावधान कर सकती है। लेकिन करार में यह शर्त शामिल नहीं रही, तो फिर सप्लायर की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। फिर यह प्रावधान भी समस्याग्रस्त है कि हादसे की सूरत में संचालक कंपनी पर अधिकतम जुर्माना 3000 करोड़ रुपये का ही लगाया जा सकेगा। नुकसान उससे ज्यादा हुआ, तो जुर्माना सरकार भरेगी। आखिर जब संचालन निजी कंपनी के हाथ में है और उसने सप्लायर से स्वतंत्र रूप से समझौता किया हुआ है, तो पीड़ितों को मुआवजा देने का बोझ भारतीय करदाताओं पर क्यों डाला जाना चाहिए?

अधिकारियों ने दावा किया है कि शांति विधेयक के पारित होने पर परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश आएगा। इससे भारत 2047 तक एक लाख मेगावाट परमाणु बिजली पैदा करने का लक्ष्य हासिल कर सकेगा। अभी 8,900 मेगावाट परमाणु बिजली ही भारत में बनती है। बहरहाल, निवेश और निर्माण संबंधी फैसले बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप होते हैं। एक बड़ा सवाल कीमत का है। परमाणु संयंत्र लगाना और उसका रखरखाव करना खासा महंगा पड़ता है। ऐसे में निवेश के लिए कितनी प्राइवेट कंपनियां आगे आएंगी और पैदा बिजली को वो उपभोक्ताओं को किस दाम पर उपलब्ध कराएंगी, ये सब भविष्य में जाकर ही जाहिर होगा। फिलहाल, यह सच है कि पेश बिल से भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़े परिवर्तन का रास्ता साफ हुआ है।


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