महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए नारी शक्ति वंदन कानून पर भाजपा का तमाशा जारी है। संसद में बिल लाने, भाषण देने और राष्ट्रीय चैनल पर देश को संबोधित करने का काम प्रधानमंत्री कर चुके हैं। अब बारी भाजपा की राज्य सरकारों की है। भाजपा की राज्य सरकारें विधानसभा का सत्र बुला कर उसमें परिसीमन और महिला आरक्षण के प्रस्ताव मंजूर कर रही हैं और सत्र में कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियों की आलोचना कर रही हैं। सोचें, भाजपा विरोधी पार्टियों की आलोचना के लिए विधानसभा के विशेष सत्र बुलाए जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश में विधानसभा का सत्र आहूत किया गया और सोमवार, 27 अप्रैल को सत्र में नारी शक्ति वंदन कानून के समर्थन में एक सरकारी प्रस्ताव मंजूर किया गया। परिसीमन करने और महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का समर्थन किया गया। प्रस्ताव पास किए जाने के समय कांग्रेस ने वाकआउट किया। इसी तरह मंगलवार, 28 अप्रैल को दिल्ली विधानसभा का एक दिन का सत्र आहूत किया गया। इसमें भी महिला आरक्षण के समर्थन में प्रस्ताव पास हुआ और विपक्ष की आलोचना की गई।
दिलचस्प बात यह है कि मध्य प्रदेश और दिल्ली दोनों जगह विपक्षी पार्टियां बैठी हुई थां कि सरकार अभी महिलाओं को आरक्षण देने का प्रस्ताव ले आए वे उसका समर्थन करेंगे। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ने कहा कि सरकार आज प्रस्ताव ले आए कि लोकसभा और विधानसभाओं में जितनी सीटें हैं उनमें से एक तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित की जा रहीं तो विपक्ष उसका तुरंत समर्थन करेगा। लेकिन भाजपा को तत्काल महिला आरक्षण नहीं देना है, उस पर तमाशा करना है।
