मुसीबत बताना जुर्म है!

Categorized as संपादकीय

संभवतः सरकार की निगाह में उससे असहमत या उसकी नाकामियों पर बात करने वाली हर आवाज अवैध है, इसलिए प्रदूषण पर बेफिक्री के खिलाफ इंडिया गेट पर जुटे महिलाओं और बुजुर्गों तक को पुलिस जबरन अपनी बसों में ले गई।

दिल्ली में जहरीली हुई हवा पर सरकारी बेफिक्री के खिलाफ नई दिल्ली में इंडिया गेट के पास इकट्ठा हुए नागरिकों से पुलिस ने वैसा ही सलूक किया, जैसा इस दौर में किसी भी विरोध प्रदर्शन के साथ किया जाता है। संभवतः भारत सरकार की निगाह में उससे असहमत या उसकी नाकामियों पर बात करने वाली हर आवाज अवैध है, इसलिए इंडिया गेट पर जुटे महिलाओं और बुजुर्गों तक को पुलिस जबरन अपनी बसों में ले गई। दूर बवाना ले जाकर उन्हें छोड़ा गया। आयोजकों से यह लिखित वादा भी लिया गया कि समन पर वे मजिस्ट्रेट के सामने हाजिर होंगे।

विरोध जताने आए नागरिकों की कोई राजनीतिक मांग नहीं थी। वे सिर्फ यह पूछ रहे थे कि उन्हें और उनके बच्चों को साफ हवा में सांस लेने का हक भी नहीं है? दिल्ली में आज यह आम धारणा है कि सरकार ने इस वर्ष इस सीजन में प्रदूषण का असली स्तर छिपाने की कोशिश की है। इस सूचना पर सुप्रीम कोर्ट भी जवाब- तलब कर चुका है कि वायु गुणवत्ता की जांच करने वाले 37 में से 28 केंद्र दिवाली के दिन बंद थे। फिर इल्जाम हैं कि जहां ये प्रदूषण की माप करने वाली मशीनें लगी हैं, वहां दिल्ली सरकार ने जानबूझ कर जल छिड़काव कराया, ताकि प्रदूषण की मात्रा कम दर्ज हो।

इन बातों ने नागरिकों में व्यग्रता पैदा की है। उनमें इसको लेकर भी आक्रोश है कि हवा के लगातार जहरीली बनी होने के बावजूद दिल्ली या केंद्र सरकार के स्तर पर कोई हरकत नहीं दिखी है। अरविंद केजरीवाल सरकार के समय कम-से-कम ऑड-इवन जैसी योजनाओं की चर्चा होती थी। चूंकि तब भाजपा दिल्ली में विपक्ष में थी, तो उसके प्रभाव से मेनस्ट्रीम मीडिया में भी यह मुद्दा गरमाया रहता था। लेकिन इस बार संकेत देने की कोशिश हुई है कि सब कुछ ठीक है! इसीलिए अपनी मुसीबत बताने की पहल नागरिकों को अपने हाथ में लेनी पड़ी। लेकिन अगर उन्होंने यह सोचा होगा कि लोकतंत्र में उनकी बात सर्वोपरि समझी जाएगी, तो इंडिया गेट से पुलिस बस में बवाना जाते हुए पर उनका ये भ्रम टूट गया होगा!


Previous News Next News

More News

कांग्रेस के अजब गजब उम्मीदवार

March 6, 2026

कांग्रेस पार्टी को इस बार राज्यसभा की एक सीट का फायदा हो रहा है। वह इसलिए हो रहा है क्योंकि एमके स्टालिन ने तमिलनाडु से एक सीट देने का फैसला किया। कांग्रेस पार्टी के नेता दिखावा करने के लिए पवन खेड़ा का नाम ले रहे थे। सबको पता था कि अगर तमिलनाडु से कांग्रेस को…

कबूतरी संचार की पुरानी व्यवस्था

March 6, 2026

ओडिशा पुलिस की यह सेवा अनूठी है। 1946 में, द्वितीय विश्व युद्ध के ठीक बाद, ओडिशा पुलिस ने इसे शुरू किया। सबसे पहले नक्सल प्रभावित कोरापुट जिले में प्रयोग किया गया। धीरे-धीरे यह 38 स्थानों (जिलों, सब-डिवीजनों, सर्कलों और पुलिस स्टेशनों) तक फैल गई। इस सेवा के चरम पर 19 ‘पिजन लॉफ्ट’ सक्रिय थे, जहां…

कैसा भूमंडलीकरण, कैसी विश्व व्यवस्था?

March 6, 2026

साफ दिखलाई दे रहा है कि भूमंडलीकरण इतिहास की अनिवार्य धारा नहीं है, बल्कि मानों एक ऐसी व्यवस्था जैसी है जो परिस्थितियों पर निर्भर है। और वह लगातार खतरे के नीचे खड़ी है। कोई भी समय कभी भी इस पूरी व्यवस्था को पटरी से नीचे उतार सकता है, जैसे इस समय भूमंडलाकरण के साथ वैश्विक…

बेहतर विदाई के हकदार थे नीतीश

March 6, 2026

बिहार में नीतीश कुमार युग का अंत हो गया है। इसमें कोई हैरानी या दुख की बात नहीं है। हर नेता का युग आता है और समाप्त होता है। बिहार में ही जैसे लालू प्रसाद का युग खत्म हुआ वैसे ही नीतीश का भी खत्म हुआ। फर्क इतना है कि लालू प्रसाद चुनाव हार कर…

नीतीश सीएम पद छोड़ेंगे

March 6, 2026

पटना। दो दशक के बाद नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनके साथ मौजूद रहे। इससे पहले नीतीश कुमार ने एक लंबी पोस्ट लिख कर सोशल मीडिया में साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा…

logo