पर गाजा की कहानी नहीं बदलेगी!

यों कहानी कुछ नहीं बदलेगी। यदि कुछ बदलेगा भी तो बस इतना कि दुनिया और गहरी अनिश्चितता में धंस जाएगी। ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया  तीनों ने दुर्लभ सामंजस्यता में फ़िलीस्तीन को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की नैतिक तत्परता दिखाई है। इसकी घोषणा के समय का चुनाव, बेशक, बहुत कुछ कहता है: मान्यता… Continue reading पर गाजा की कहानी नहीं बदलेगी!

हंसी पर ताला, गुस्से को आज़ादी!

कॉमेडी, मजाक जब खामोश हो जाए तो क्या होगा? खासकर यदि सार्वजनिक जीवन से हास्य को कोड़ा मारकर बेदखल कर दिया जाए, तब?  सबकुछ  नीरसता, उदासीनता में ढलेगा।  न विवेकशील रहेंगे और न कल्पनाशक्ति में जिंदादिलह। तब गुस्सा छोटा होता जाता है और हवा भारी। तब हर असहमति गुस्से में बदलती है। हम सत्ता पर… Continue reading हंसी पर ताला, गुस्से को आज़ादी!

नेतन्याहू का अंतहीन युद्ध

यह सवाल हर बार और ज़्यादा डरावना हो उठता है- आखिर बेंजामिन नेतन्याहू रूक क्यों नहीं रहे? बमबारी क्यों जारी रखते हैं? क्या वे कभी रुकने का, लड़ाई थामने का इरादा भी रखते हैं? इज़राइल को कितनी राजधानियों को निशाना बनानी है? इससे पहले कि वह खुद से पूछे: आख़िर किस मक़सद के लिए? सात… Continue reading नेतन्याहू का अंतहीन युद्ध

दक्षिण एशिया की जेन-जेड का सच

नेपाल से उठा धुआँ भारत के सोशल मीडिया में सरक आया है। बुधवार की सुबह से जेन-जेड का नैरेटिव चर्चा में है। कहने वाले कह रहे हैं कि भारत के युवा नेपाल से अलग हैं। उन्हे भले बेरोज़गारी और अमीरी-गरीबी की खाई चुभती हों, बावजूद इसके उन्हें भक्ति और तमाशा ज़्यादा पसंद है। क्या सचमुच?… Continue reading दक्षिण एशिया की जेन-जेड का सच

राजपक्षे, हसीना, ओली और निठल्ले नौजवानों का ग़ुस्सा

निठल्ले नौजवान जितने दिल्ली में हैं, उतने ही काठमांडू, ढाका, कोलंबो मतलब पूरे दक्षिण एशिया में हैं। इन निठल्लों ने दक्षिण एशिया के तीन राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों के इस्तीफे कराए। उन्हें दौड़ाया, भगाया। कोलंबो, ढाका, काठमांडू ने यह भी बताया कि राजपक्षे, हसीना वाजेद और ओली भले राष्ट्रवादी होने, “56 इंची छाती” या “लौह महिला”… Continue reading राजपक्षे, हसीना, ओली और निठल्ले नौजवानों का ग़ुस्सा

‘परेशानी’ (नलों में सीवरेज पानी) का अमृतकाल!

“परेशानी” कहे या ‘असुविधा’,  यह शब्द हम भारतीयों के रोजाना का अनुभव है। हर व्यक्ति, हर घर, हर गली का स्थाई सच। भारत के लोगों के जीवन का ढंग है। और यह आम इसलिए है क्योंकि हम उस व्यवस्था, सिस्टम, उस तंत्र को सामान्य मानकर बड़े हुए हैं जिसमें शासन-प्रशासन नागरिक को तंग न करें… Continue reading ‘परेशानी’ (नलों में सीवरेज पानी) का अमृतकाल!

बाढ़ में डूबे तब भी ट्रोल के लिए राहुल!

इस साल का मानसून कोई मौसम नहीं बल्कि एक रहस्योद्घाटन है। भविष्य की भयावह चेतावनी है। बादलों के फटने और डूबते शहरों में लिखी वह सच्चाई है जिसे देश को लगातार झेलना होगा। अभी समय  है या जलवायु परिवर्तन के खतरे दूर है जैसे सभी भ्रम बह गए है। बाढ़ इबारत लिख रही है कि… Continue reading बाढ़ में डूबे तब भी ट्रोल के लिए राहुल!

एक तस्वीर और “अजेय चीन”?

वह महज तस्वीर नहीं थी।  केवल एक रस्म नहीं थी। बल्कि भविष्यवाणी, आकाशवाणी की तरह गूंजी। फोटो के बीच में शी जिनपिंग, उनकी एक ओर व्लादिमीर पुतिन, दूसरी ओर किम जोंग-उन। ये तीनों बीजिंग में एक विराट सैन्य परेड के मंच पर सीढ़ियाँ चढ़ते हुए। मौक़ा गंभीर था: द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं… Continue reading एक तस्वीर और “अजेय चीन”?

भारत अब कूटनीति भी दिखाता है!

कूटनीति गुपचुप मौन में होती है। पर इन दिनों भारत कूटनीति और सैन्य ऑपरेशन (आरपेशन सिंदूर) दोनों का एक सा प्रदर्शन कर रहा है। भारत अपनी कूटनीति को साउथ ब्लॉक के गलियारों की मौन रणनीति के मौन परिणामों से नहीं, बल्कि ड्रॉइंग रूम, फ़ोन की स्क्रीन और खाने की मेज़ों तथा फोटोशूट से दिखलाता है।… Continue reading भारत अब कूटनीति भी दिखाता है!

उमस, थकान और सीलन का समय

हवा में थकान तैर रही है। जैसे उमस, नमी हर चीज़ से चिपक गई हो — राजनीति से लेकर अर्थव्यवस्था तक, और हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी की लय सभी में। हर मानसून में ऐसा ही नुकसान दोहराता है। हर बहस उन्हीं घिसे-पिटे तर्कों में उलझी रहती है। हर बहस उसी रटे-रटाए विमर्श में घूमती रहती… Continue reading उमस, थकान और सीलन का समय

logo