तीन सवाल, चार मांगें

“वोट चोरी” के इल्जाम में दम है या नहीं- यह बहस का विषय है। मगर, यह भी सच है कि उन प्रश्नों से इस नैरेटिव को वजन मिला है, जो राहुल गांधी ने लोकसभा में उठाए। उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। चुनाव सुधार पर बहस के दौरान राहुल गांधी ने सरकार से तीन… Continue reading तीन सवाल, चार मांगें

बजट नहीं है जरिया

खबरों के मुताबिक सरकार इस आकलन पर है कि पूंजी केंद्रित उद्योग पर्याप्त रोजगार पैदा नहीं कर रहे, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है। इसलिए अब श्रम केंद्रित कारोबार में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। मगर मुद्दा है कि यह निवेश कौन करेगा? खबरों के मुताबिक श्रम केंद्रित कारोबार को खड़ा करना अब केंद्र की प्राथमिकता… Continue reading बजट नहीं है जरिया

सुझाव काबिल-ए-गौर है

बेहतर होगा कि नेहरू और पूर्व तमाम सरकारों ने जो गलत किया उन पर दो अलग-अलग श्वेत पत्र निकाले जाएं। उससे देश अतीत में उलझी बहसों से बाहर निकल सकेगा। फिर आज की गंभीर समस्याओं पर ध्यान केंद्रित चर्चा हो सकेगी। वंदे मातरम पर बहस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने, शायद कटाक्ष में,… Continue reading सुझाव काबिल-ए-गौर है

क्रिकेट बबल और मोनोपॉली

दो बातें साफ हैं। पहली यह कि क्रिकेट का बाजार जितना बड़ा बताया जाता है, असल में वह है नहीं। दूसरी यह कि ना सिर्फ क्रिकेट, बल्कि भारत के पूरे खेल बाजार पर एक कंपनी समूह की मोनोपॉली बन गई है। टी-20 वर्ल्ड कप से सिर्फ दो महीने पहले जियो हॉटस्टार का प्रसारण करार से… Continue reading क्रिकेट बबल और मोनोपॉली

अनिश्चय का साया हटे

अनिश्चय दो स्तरों पर है। पहला यह कि क्या रूस से तेल आयात में कटौती के बाद इस कारण लगे 25 फीसदी शुल्क को अमेरिका जल्द हटाएगा और दूसरा यह कि बाकी 25 फीसदी में वह कितनी छूट देगा। द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर वार्ता के लिए अमेरिकी दल के भारत आने से ठीक पहले भारतीय… Continue reading अनिश्चय का साया हटे

ट्रंप की बदली प्राथमिकता

ट्रंप प्रशासन की नई सुरक्षा रणनीति में चीन का मुकाबला करने लिए अमेरिका को तैयार करने पर खासा जोर दिया गया है। मगर ऐसा लगता है कि इस मकसद को हासिल करने में अमेरिका अब भारत को ज्यादा महत्त्वपूर्ण नहीं मानता। चर्चा तो काफी समय से थी, लेकिन अब इसकी औपचारिक घोषणा हो गई है।… Continue reading ट्रंप की बदली प्राथमिकता

कॉरपोरेट के आगे असहाय

क्रोनी कैपिटलिज्म में राजसत्ता पसंदीदा पूंजीपतियों को अनुचित लाभ पहुंचाती है। यह लाभ पाने के लिए पूंजीपति सत्ताधारियों को प्रसन्न रखने की कोशिश करते हैं। जबकि इंडिगो प्रकरण में केंद्र असहाय नजर आया और आखिरकार उसने घुटने टेक दिए। इंडिगो एयरलाइन्स के मामले ने बताया है कि भारत में सरकार और उपभोक्ता दोनों कॉरपोरेट्स- खासकर… Continue reading कॉरपोरेट के आगे असहाय

अब फिक्र भी नहीं!

जिस दौर में सरकारों की मेधा पर्यावरण संरक्षण कानूनों को इस तरह तोड़ने- मरोड़ने में लगी हो, जिससे ये प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन में आड़े ना आएं, उनसे किसी प्रकार के हल की उम्मीद रखना बेबुनियाद ही है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र पर छाये स्मॉग से जल्द राहत मिलने की संभावना नजर नहीं आती। इसका… Continue reading अब फिक्र भी नहीं!

अबकी बार नब्बे पार

स्थिति इसलिए अधिक गंभीर है, क्योंकि रुपये की कीमत उन अधिकांश देशों की मुद्राओं की तुलना में गिरी है, जिनसे भारत कारोबार करता है। बीते एक साल में 40 विदेशी मुद्राओं के बास्केट की तुलना में रुपया सस्ता हुआ है। रुपया गिरते- गिरते एक अमेरिकी डॉलर की तुलना में 90 की मनोवैज्ञानिक संख्या को पार… Continue reading अबकी बार नब्बे पार

नहीं है यह समाधान

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत अवसर एक लाख 65 हजार थे, लेकिन सवा 33 हजार नौजवान ही ज्वाइन करने को तैयार हुए। उनमें से भी लगभग 20 फीसदी ने बीच अवधि में ही इसे छोड़ दिया। यह कहना शायद जल्दबाजी हो कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना फेल हो गई है। फिर भी यह तो कहा ही… Continue reading नहीं है यह समाधान

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